अमेरिका और इस्राइल की साजिशों के खिलाफ ईरान का कड़ा रुख, प्रतिबंधों के बीच कूटनीति और रक्षा को बताया जरूरी.

ईरान सरकार ने 29 अगस्त 2026 को आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की कि वह अमेरिका के प्रतिबंधों और अमेरिका-इस्राइल की साजिशों के सामने बिल्कुल नहीं झुकेगा। सर्वोच्च नेता मोजतबा खामनेई के मार्गदर्शन में लिए गए इस फैसले के तहत देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए कूटनीति और रक्षा को बेहद जरूरी बताया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है और फारस की खाड़ी में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
ईरान प्रशासन ने देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कई अहम घरेलू प्राथमिकताएं तय की हैं। सरकार का मुख्य ध्यान महंगाई को नियंत्रित करने, नए रोजगार के अवसर पैदा करने, राष्ट्रीय उत्पादन को बढ़ावा देने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने पर है। इसके साथ ही ईरान के विदेश मंत्रालय ने दुनिया के बाकी देशों से यह अपील की है कि वे अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों का खुलकर विरोध करें। मंत्रालय का कहना है कि ऐसे प्रतिबंधों का समर्थन करना असल में किसी एक देश की मर्जी को दूसरों पर थोपने जैसा है।
समुद्री यातायात और व्यापार पर असर
फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बना हुआ है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स (IRGC) की नौसेना ने अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की बात कही गई थी। IRGC ने अमेरिका पर वैश्विक तेल की कीमतों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने यह बात स्वीकार की है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से देश के विदेशी व्यापार में 35 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि ओमान ने एक ऐसे समझौते के ढांचे को स्वीकार कर लिया है जिससे जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद बंधती है.
कूटनीतिक बातचीत और मध्यस्थता की कोशिशें
तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत जारी है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने 28 अगस्त को यह स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका यह मान ले कि दबाव की उसकी नीतियां पूरी तरह विफल हो चुकी हैं, तो वाशिंगटन के साथ बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। इसके अलावा कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी 28 अगस्त को तेहरान में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर मध्यस्थता की कोशिशों को आगे बढ़ाया। वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, इस मौजूदा गतिरोध की वजह से लगभग 6,000 नाविक फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं जो आम लोगों की आजीविका के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है.