Iran War Impact: ईरान युद्ध के कारण नाइजीरिया में गहराया खाद्य संकट, भुखमरी की चपेट में बच्चे

ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का असर अब हजारों किलोमीटर दूर नाइजीरिया तक पहुंच गया है, जहां लोगों को गंभीर महंगाई और खाने की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी 2026 को शुरू किए गए इस युद्ध ने नाइजीरिया में आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। बोडिंग्गा से अलजazeera इंग्लिश के पत्रकार अहमद इद्रीस ने रिपोर्ट किया कि इस अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की वजह से नाइजीरियाई नागरिकों को अपने घर से बहुत दूर हो रहे युद्ध की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। युद्ध के हालात तब और ज्यादा बिगड़ गए जब 1 सितंबर 2026 को दक्षिणी ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर अमेरिकी हवाई हमले किए गए। इसके बाद अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य एक्शन को रोकने वाला प्रस्ताव 24 सितंबर 2026 को बहुत कम वोटों के अंतर से खारिज कर दिया था।
घरेलू संकट और पेट्रोल की कीमतें
नाइजीरिया में इस वैश्विक तनाव के अलावा देश के अपने अंदरूनी आर्थिक फैसले भी स्थिति को बदतर बना रहे हैं। राष्ट्रपति बोला टीनुबु की सरकार द्वारा पेट्रोल पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया गया है और देश की करेंसी naira की वैल्यू में भी लगातार गिरावट आ रही है। पेट्रोल की कीमतें जो फरवरी 2026 में 800 naira प्रति लीटर थीं, वे बढ़कर अप्रैल 2026 तक सीधे 1,400 naira प्रति लीटर पर पहुंच गईं। इस बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से गाड़ियों से सामान ढोने का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ गया है और बाजार में हर चीज के दाम आसमान छू रहे हैं। कृषि क्षेत्र के जानकारों ने मार्च 2026 में ही यह बात साफ कर दी थी कि युद्ध की वजह से खाद और उर्वरक महंगे हो गए हैं, जिससे देश में खेती और अनाज का उत्पादन भी काफी घट गया है।
बच्चों में कुपोषण का बढ़ता खतरा
मेडिकल प्रैक्टिशनर अहमद मूसा ने चेतावनी दी है कि खाने-पीने की चीजों के दाम इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि लोगों को अपने परिवार के लिए भोजन राशन करके खाना पड़ रहा है। इस मजबूरी के कारण छोटे बच्चों में खतरनाक स्तर पर कुपोषण फैल रहा है। OCHA (Office for the Coordination of Humanitarian Affairs) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 के लीन सीजन के दौरान लगभग 3.5 करोड़ नाइजीरियाई नागरिकों को गंभीर खाद्य सुरक्षा संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा पांच साल से कम उम्र के लगभग 30 लाख बच्चों के पूरे साल गंभीर और जानलेवा कुपोषण से पीड़ित रहने की आशंका जताई गई है। इस बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb की रिपोर्ट में दी गई है।
वैश्विक स्तर पर बच्चों पर असर
UNICEF की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर कैथरीन रसेल ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि मिडिल ईस्ट से बहुत दूर रहने वाले बच्चे भी इस जंग की भारी कीमत चुका रहे हैं। इस संघर्ष के प्रभाव से दुनिया भर में लगभग 2.34 करोड़ अतिरिक्त बच्चों के गरीबी रेखा से नीचे जाने का खतरा मंडरा रहा है, जैसा कि UNICEF की विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है। वर्तमान में FEWS NET की रिपोर्टों से भी यह बात पक्की होती है कि युद्ध और आर्थिक दबाव के कारण उत्तरी नाइजीरिया के बोर्नो, अदामावा और योबे राज्यों में इमरजेंसी यानी IPC Phase 4 जैसी भुखमरी की स्थिति लगातार बनी हुई है।