Iran Warning: ईरान की पड़ोसी देशों को खुली धमकी, सिविल विमानों को निशाना बनाने का किया ऐलान।

क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा और गंभीर बयान जारी किया है जिसमें उसने अपने पड़ोसी देशों के सिविल विमानों को निशाना बनाने की सीधी धमकी दी है। यह चेतावनी ईरान की उड़ानों में लगातार आ रही रुकावटों के जवाब में दी गई है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। आम लोगों और सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति काफी चिंताजनक बन गई है, क्योंकि इस तरह के बयानों से हवाई सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
उड़ानों पर रोक और अमेरिका की सख्ती
इराक सरकार ने सुरक्षा कारणों से एक बड़ा कदम उठाते हुए 25 सितंबर 2026 से ईरान जाने वाली और वहां से आने वाली सभी उड़ानों को पूरी तरह निलंबित कर दिया है। यह फैसला नजफ एयरपोर्ट के जरिए लागू किया गया है। इस निलंबन के पीछे मुख्य वजह यह है कि अमेरिका ने उन सभी एयरपोर्ट्स और सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी जो ईरानी एयरलाइंस को अपनी सेवाएं दे रहे थे। इन राजनीतिक और सामरिक उठापटक के बीच इराक में सुरक्षा का एक नया दौर शुरू हो रहा है, क्योंकि अमेरिकी नेतृत्व वाला ग्लोबल कोएलिशन अगेंस्ट आईएसआईएस 30 सितंबर 2026 तक इराक से अपना मिशन पूरी तरह समाप्त कर रहा है।
लड़ाई-झगड़े खत्म करने की प्रक्रिया और समयसीमा
इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी इस समय ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों के हथियारों को जमा करने की जटिल प्रक्रिया को संभालने में जुटे हुए हैं। इन समूहों में पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्सेज, काताएब सैय्यद अल-शुहदा और सिनजार रेजिस्टेंस यूनिट्स शामिल हैं। हालांकि हथियारों को सरेंडर करने की शुरुआती डेडलाइन 30 सितंबर 2026 तय की गई थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे बढ़ाकर जून 2027 करने का प्रस्ताव रखा है। इस पूरी योजना का समर्थन सुरक्षा सलाहकार कासिम अल-अराजी ने भी किया है।
यह समझौता दो चरणों में पूरा होगा। पहले चरण की शुरुआत 1 अक्टूबर 2026 से होगी और यह 1 जनवरी 2027 तक चलेगा। इस दौरान सभी गुटों को भड़काऊ बयांबाजी और सैन्य अभियानों को पूरी तरह रोकने का आदेश दिया गया है। इसके बाद दूसरे चरण में इन समूहों को अपने रणनीतिक हथियार जैसे कि बैलिस्टिक मिसाइलें, रॉकेट और ड्रोन धीरे-धीरे सरकार को सौंपने होंगे।
तुर्की और इराक के बीच समझौता
क्षेत्रीय सुरक्षा के इस बदलते माहौल में तुर्की और इराक के बीच भी एक समझौता हुआ है, जिसके तहत मोसुल के पास बशीका-जेलिकन कैंप से तुर्की की सेनाओं को धीरे-धीरे हटाया जाएगा। इसके बदले में इराक ने सिनजार में यजीदी आत्म-रक्षा समूह को बेअसर करने की जिम्मेदारी ली है। इन सभी कूटनीतिक प्रयासों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी बातचीत शामिल है। इन सबका मुख्य उद्देश्य उन सशस्त्र समूहों के प्रभाव को कम करना है जिन्होंने पहले कुर्दिस्तान क्षेत्र में तेल के बुनियादी ढांचे पर ड्रोन से हमले किए थे।