ईरान ने दी बड़ी चेतावनी, कहा कि किसी भी सैन्य हमले का भारी खामियाजा भुगतना होगा और ऊर्जा बाजार बिगड़ जाएगा
ईरान के सुरक्षा परिषद सचिव ने कहा कि किसी भी सैन्य हमले का भारी खामियाजा भुगतना होगा और ऊर्जा बाजार प्रभावित होगा।

तेहरान: ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रजाई ने चेतावनी दी है कि इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई की भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान के पास जवाबी कार्रवाई करने के लिए जरूरी साधन मौजूद हैं। हालांकि, रजाई ने यह भी साफ किया कि अगर सहमति बनती है तो ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है।
रजाई ने आगाह किया कि मौजूदा अस्थिरता की वजह से ऊर्जा बाजार में तीन साल तक उथल-पुथल बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश अब अपने भू-राजनीतिक समीकरणों को फिर से तय कर रहे हैं क्योंकि उन्हें इस बात पर संदेह है कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में अपने ठिकानों की रक्षा कर पाएगी या नहीं।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अगर उसके अधिकारियों की हत्या की गई या आम नागरिकों को मारा गया, तो युद्ध का समर्थन करने वाले देशों के आर्थिक बुनियादी ढांचे और अमेरिकी राजनीतिक संपत्तियों को वैध लक्ष्य माना जाएगा। इसके साथ ही सुरक्षा परिषद के सचिव ने कहा कि ईरान से समृद्ध यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं जाएगा और इसे एक संरक्षित राष्ट्रीय संपत्ति माना जाएगा।
वॉशिंगटन के साथ बातचीत पर रजाई ने कहा कि जब तक अमेरिका भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने मांग की कि अमेरिका मौजूदा युद्ध खत्म करे, ईरान के फ्रीज किए गए फंड जारी करे और नौसैनिक नाकाबंदी हटाए।
यह चेतावनी हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारी तनाव के बाद आई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि एक रात में सात तेल टैंकर क्षतिग्रस्त हो गए, जिनमें से चार में आग लग गई और तीन नौसैनिक माइन्स की वजह से रुक गए। IRGC ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका ने जहाजों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजारने की कोशिश जारी रखी, तो यह संघर्ष मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक फैल सकता है।
इसी बीच ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबबादी ने 22 अक्टूबर को चीनी राजदूत कोंग पेइवु से मुलाकात की। इस बैठक में रणनीतिक सहयोग बढ़ाने, राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करने और क्षेत्रीय एकतरफावाद का मुकाबला करने पर चर्चा की गई।