ट्रंप की धमकी से नहीं डरेगा ईरान, युद्ध की अवधि तय नहीं कर सकते अमेरिकी राष्ट्रपति: रक्षा मंत्री

ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है कि युद्ध की अवधि वे तय नहीं कर सकते। साथ ही IMO में अमेरिकी और इजरायली हमलों के सबूत सौंपे।

Gautam Sahu1 November 20262 min read0 viewsWorld
ट्रंप की धमकी से नहीं डरेगा ईरान, युद्ध की अवधि तय नहीं कर सकते अमेरिकी राष्ट्रपति: रक्षा मंत्री

तेहरान: ईरान के रक्षा मंत्री महरदाद अखलाघी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सख्त चेतावनी दी है कि तेहरान के खिलाफ किसी भी हमले का जवाब "आनुपातिक, निर्णायक और प्रभावशाली" होगा। उन्होंने साफ किया कि अगर अमेरिका के साथ फिर से टकराव शुरू होता है, तो यह एक लंबे युद्ध में बदल सकता है, जिसे ट्रंप अपनी मर्जी से खत्म नहीं कर पाएंगे।

अखलाघी ने कहा कि बाहरी हमलावरों का जवाबी कार्रवाई की दिशा पर कोई नियंत्रण नहीं होगा और दुश्मन यह तय नहीं कर सकते कि तेहरान क्या कदम उठाएगा। अल जजीरा के मुताबिक, रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि जो लोग धमकियां दे रहे हैं, वे ईरान की रक्षात्मक प्रतिक्रिया के दायरे, समय या परिणामों को तय नहीं करेंगे।

ईरानी अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ युद्ध का कोई भी नया दौर पिछले सैन्य संघर्षों की तुलना में कहीं अधिक लंबा खिंच सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शत्रुता कब समाप्त होगी, इसका फैसला ट्रंप नहीं करेंगे।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

यह तनाव इस साल की शुरुआती सैन्य गतिविधियों के बाद बढ़ा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के बाद करीब 40 दिनों तक तीव्र सैन्य संघर्ष चला था। हालांकि अप्रैल तक भारी लड़ाई कम हो गई थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच रुक-रुक कर हमले जारी रहे हैं।

इसी बीच, ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) को एक डोजियर सौंपा है। इसमें अमेरिकी और इजरायली हमलों से जुड़े दस्तावेज और फोटोग्राफिक सबूत शामिल हैं। इन सबूतों को 'महत्वपूर्ण शिपिंग लेन की सुरक्षा' एजेंडे के तहत IMO सदस्य देशों के बीच वितरित किया गया है, जिसकी समीक्षा 2 से 6 नवंबर तक लंदन में होने वाले काउंसिल सत्र के दौरान की जाएगी।

ईरान ने तर्क दिया है कि समुद्री बुनियादी ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और नाविकों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। आईआरएनए (IRNA) के अनुसार, समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल नेटवर्क पर हमलों से दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है और आपातकालीन बचाव सुविधाओं के नष्ट होने से आपदा प्रतिक्रिया क्षमता प्रभावित होती है।

दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को "आतंकवादी संगठन" घोषित किया है। साथ ही, ब्रिटेन की सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस (MI6) को "शत्रु समूह" की श्रेणी में रखा गया है। विदेश मंत्रालय ने 1 नवंबर को जारी बयान में कहा कि यह फैसला सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है।

ईरान ने ब्रिटिश सरकार पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है। मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटेन ने अपने अधिकार क्षेत्र वाले सैन्य और लॉजिस्टिक ठिकानों के जरिए ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध में मदद की है।

इस फैसले के पीछे 13 जुलाई 2026 को ब्रिटिश सरकार द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को 'स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026' के तहत रखने के निर्णय का भी जिक्र किया गया है। अब MI6 पर जासूसी और शत्रु देशों के साथ सहयोग के खिलाफ बने ईरानी कानून के प्रावधान लागू होंगे।

Share:

Comments

Leave a comment