इजरायल के पीएम की अबू धाबी यात्रा पर भड़का ईरान, यूएई को दी बड़ी चेतावनी

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अबू धाबी की हालिया यात्रा ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच कूटनीतिक जंग छेड़ दी है। ईरान ने इस यात्रा को बेहद खतरनाक बताते हुए चेतावनी दी है कि इस तरह के कदम से क्षेत्र की स्थिरता को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
गुप्त यात्रा और ईरान का तीखा हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार 27 सितंबर को नेतन्याहू ने अबू धाबी का एक बेहद गोपनीय छह घंटे का दौरा किया। हालांकि शुरुआत में इस यात्रा की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी, लेकिन बाद में यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने नेतन्याहू से मुलाकात की।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात की कड़ी निंदा करते हुए नेतन्याहू को "युद्ध का समर्थक" और "अपराधी" करार दिया है। ईरान का कहना है कि एक ऐसे नेता की मेजबानी करना जो अंतरराष्ट्रीय कानूनी जांच के घेरे में है, पूरे क्षेत्र के लिए "अत्यंत खतरनाक और चिंताजनक" है।
मुलाकात के मुख्य एजेंडे: ईरान का परमाणु कार्यक्रम
इस उच्च स्तरीय बैठक में कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई। इजरायली मीडिया और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत का मुख्य केंद्र ईरान का परमाणु कार्यक्रम रहा। चर्चाओं में तेहरान से लगभग 140 मील दक्षिण में स्थित "पिकएक्स माउंटेन" साइट पर कथित नए निर्माण के बारे में भी बात की गई।
- सुरक्षा चिंताएं: नेतन्याहू ने क्षेत्र में होने वाले संभावित हमलों के प्रति चेतावनी दी।
- क्षेत्रीय गठबंधन: इजरायली मीडिया ने दावा किया कि इस सत्र में सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान और अमेरिका जैसे देशों के अधिकारी भी शामिल थे, हालांकि सऊदी अरब ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
- सुरक्षा घेरा: नेतन्याहू अपने साथ मोसाद प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की एक बड़ी टीम लेकर पहुंचे थे।
क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता खतरा
ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि क्षेत्रीय सुरक्षा "सामूहिक और अविभाज्य" है। तेहरान ने खाड़ी देशों को आगाह किया है कि वे ऐसे "अस्थिर करने वाले तत्वों" को मंच प्रदान न करें जो शांति को भंग कर सकते हैं।
यह कूटनीतिक टकराव ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व का संघर्ष आठवें महीने में प्रवेश कर चुका है। इस तनाव का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के पास उड़ान कार्यक्रमों और शिपिंग मार्गों पर भी पड़ रहा है, जिससे इस क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों की सुरक्षा और व्यापार पर संकट मंडरा रहा है।