ईरान ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य जहाजों के प्रवेश पर लगाई रोक और दी कड़ी चेतावनी
ईरान ने कहा कि वह फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य जहाजों को प्रवेश नहीं करने देगा। तनाव के बीच सैन्य कार्रवाई की संभावना बढ़ी है।

तेहरान: ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर अमेरिकी सैन्य जहाजों को फारस की खाड़ी में दाखिल नहीं होने देगा। ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत ने अमेरिकी नौसेना को बेअसर कर दिया है, जिससे वह खाड़ी या ईरान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के करीब नहीं आ सकती।
यह बयान ईरानी राज्य टेलीविजन IRIB पर प्रसारित हुआ। अब्दुल्लाही ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को भी चुनौती दी, जिनमें ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करने की बात कही गई थी।
यह विवाद तब बढ़ा जब 23 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और 'एपिक फ्यूरी' ऑपरेशन शुरू कर सकता है। इसी बीच अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जे क्लेटन ने चेतावनी दी कि ईरान विदेशों में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें बढ़ा रहा है। इस खतरे को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व के दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है।
एक अमेरिकी दूत ने भी 23 अक्टूबर को संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इसी सप्ताहांत तक हो सकती है। इस बीच क्षेत्र में समुद्री स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।
ईरान ने 28 फरवरी 2026 को 'शत्रुतापूर्ण' जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था और वहां से गुजरने के लिए परमिट अनिवार्य कर दिया था। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 16 सितंबर 2026 को कहा था कि यह जलमार्ग पार करने के लिए खुला है।
22 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जलडमरूमध्य की स्थिति 'प्रतिबंधित' है। यहां व्यावसायिक यातायात युद्ध से पहले के स्तर का केवल 4 प्रतिशत रह गया है, जो या तो अमेरिकी नौसेना के समन्वय या ईरानी परमिट के जरिए चल रहा है।
आईआरजीसी नेवी ने 22 अक्टूबर को बताया कि उन्होंने तेल ट्रांसफर में शामिल चार जहाजों पर हमला किया है। इसके अलावा खाड़ी में तीन अन्य जहाज बारूदी सुरंगों की चपेट में आए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर बिना अनुमति के प्रवेश किया गया, तो क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले हो सकते हैं।