हॉर्मुज जलडमरूमध्य में असुरक्षा अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता का नतीजा है और इसे केवल बातचीत से सुलझाया जा सकता है: अराघची

तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि सामरिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती असुरक्षा अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई सैन्य आक्रामकता का अनिवार्य परिणाम है। उन्होंने साफ किया कि क्षेत्रीय संकटों का समाधान ताकत के इस्तेमाल से नहीं किया जा सकता।
तेहरान में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि विदेशी सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ तेहरान और मॉस्को का नजरिया एक समान है। उन्होंने बताया कि रूस के साथ उनका साझा विचार है कि क्षेत्रीय मुद्दों का कोई सैन्य समाधान नहीं है और इन्हें कूटनीति और राजनीतिक तरीकों से सुलझाना चाहिए।
अराघची ने अस्थिरता के लिए सीधे तौर पर वॉशिंगटन और तेल अवीव को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में असुरक्षा अमेरिका और जायोनी शासन की सैन्य आक्रामकता का नतीजा है जो अलग-अलग रूपों में जारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा क्षेत्रीय संघर्ष अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बने हुए हैं।
फिलिस्तीन, लेबनान और यमन की स्थिति पर बात करते हुए ईरानी राजनयिक ने इजरायली हमलों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की जरूरत पर जोर दिया। अराघची ने कहा कि फिलिस्तीन में हो रहे नरसंहार और जायोनी शासन के खतरनाक विस्तारवाद को तुरंत रोका जाना चाहिए।
समुद्री मार्गों के अलावा अराघची ने कैस्पियन सागर में उभरते सुरक्षा खतरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि ईरान और रूस दोनों ही कैस्पियन सागर में असुरक्षा और विशेष रूप से ईरानी और रूसी जहाजों पर हुए हमलों को लेकर गंभीर हैं।
पड़ोसी देशों की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान को स्थिर करने, काबुल और इस्लामाबाद के बीच तनाव कम करने और आतंकी खतरों से निपटने के मामले में तेहरान और मॉस्को एकमत हैं।
रूस के विदेश मंत्री लावरोव का स्वागत करते हुए अराघची ने दोनों देशों के बीच हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौते के कार्यान्वयन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ईरान और रूस के संबंध रणनीतिक हैं और अब यह और अधिक महत्वपूर्ण आयाम ले चुके हैं।
अराघची के मुताबिक दोनों देशों ने आर्थिक, वाणिज्यिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में संबंधों के विस्तार के लिए व्यावहारिक समाधानों पर विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक क्षेत्र में निरंतर परामर्श हो रहा है और संबंधों के विस्तार में कोई गंभीर बाधा नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और रूस अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संयुक्त राजनयिक प्रयास जारी रखेंगे और मुख्य रूप से अमेरिका के एकतरफा आक्रामक रवैये का मुकाबला करने के लिए सहयोग करेंगे।