दुबई, दोहा, बहरीन समेत हर अरब देशों पर ईरान करेगा हमला, अमेरिका को समर्थन देना पड़ेगा भारी.

तेहरान: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव का पारा चढ़ गया है। ईरान की सेनाओं की संयुक्त कमान खतम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने रविवार को एक धमकी भरा बयान जारी करते हुए दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने का फैसला कर लिया है — और यह फैसला यूरोप के एक देश में हुई एक संयुक्त बैठक में कुछ क्षेत्रीय (खाड़ी) देशों की मंज़ूरी के साथ लिया गया।
ईरान का सीधा और खतरनाक अल्टीमेटम
ईरानी सेना के बयान के मुताबिक, अगर अमेरिका ने कोई "गलती" की तो नतीजे भयानक होंगे:
"अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई की, तो क्षेत्र में मौजूद उसके सभी ठिकाने, सुविधाएं और हित लगातार हमलों का निशाना बनेंगे।"
और सिर्फ अमेरिका ही नहीं — ईरान ने उन खाड़ी देशों को भी सीधी चेतावनी दे दी है जो अमेरिका का साथ देंगे:
"जो भी क्षेत्रीय देश अमेरिकी हमले का समर्थन करेगा, उसे इस हमले में भागीदार माना जाएगा और ईरान की सशस्त्र सेनाओं से किसी संयम की उम्मीद न रखे।"
सीमाओं पर बढ़ी हलचल — रैपिड रिएक्शन फोर्स तैनात
धमकी सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रही। ईरानी सेना ने इसी दिन ऐलान किया कि उसने स्पेशल फोर्सेस, रैपिड रिएक्शन यूनिट्स, मैकेनाइज़्ड यूनिट्स और आर्टिलरी यूनिट्स को उत्तर-पश्चिम, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पूर्व की सीमाओं के साथ-साथ मकरान तट पर भी तैनात कर दिया है।

आखिर माजरा क्या है? पूरी टाइमलाइन समझिए
- 28 फरवरी 2026: अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर बड़ा हमला बोलकर जंग शुरू की
- ईरान ने जवाब में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ बंद कर दिया — दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक
- जून 2026: वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक फ्रेमवर्क डील हुई, जिसमें जंग रोकने और हॉर्मुज़ को दोबारा खोलने पर सहमति बनी
- 7 जुलाई 2026: यह नाज़ुक सीज़फायर टूट गया, ईरानी टैंकरों पर हमलों के बाद अमेरिका ने फिर से हमले शुरू किए
- 10 जुलाई 2026: ट्रंप ने कांग्रेस को औपचारिक रूप से सूचित किया कि अमेरिका ने ईरान पर हमले फिर शुरू कर दिए हैं
- और अब 20 सितंबर 2026 को ईरान का यह ताज़ा दावा — कि अमेरिका खाड़ी देशों की शह पर एक और बड़े हमले की तैयारी में है
ईरान की शर्तें भी आईं सामने
इसी बीच ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रज़ाई ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में बताया कि ईरान ने मध्यस्थों को अपनी शर्तें साफ बता दी हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना
- ईरान का जमा फंड अनफ्रीज़ करना
- नौसैनिक नाकाबंदी हटाना
कतर और अन्य मध्यस्थों से बातचीत अभी भी जारी बताई जा रही है।
क्या फिर बंद होगा हॉर्मुज़ का रास्ता?
तेहरान ने पहले ही साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका जंग खत्म नहीं करता और उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा — जिसका सीधा असर दुनिया भर की तेल सप्लाई और खाड़ी में काम कर रहे लाखों भारतीयों पर पड़ सकता है।
⚠️ ध्यान दें: ईरान का यह दावा उसकी अपनी सैन्य कमान का बयान है, जिसे अमेरिका या किसी क्षेत्रीय देश की तरफ से अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं मिली है।