ईरान की दोटूक: क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों का पुनर्निर्माण नहीं होने देंगे
ईरान ने ऐलान किया है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को दोबारा नहीं बनने देगा। ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने सख्त चेतावनी दी है।

तेहरान: ईरानी सेना ने साफ कर दिया है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के पुनर्निर्माण की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी। सेना का दावा है कि मौजूदा संघर्ष के दौरान अमेरिकी बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और अब उन्हें दोबारा पैर जमाने नहीं दिया जाएगा।
ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने कहा कि सैन्य बल उन ठिकानों को फिर से बनाने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेंगे, जिन्हें वे दुश्मन के सैन्य ठिकाने बताते हैं।
ईरानी सैन्य आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को दोनों देशों के बीच शुरू हुई शत्रुता के बाद से क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और तैनाती केंद्रों के 228 से अधिक स्थान या तो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं या पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
ईरानी अधिकारियों का यह भी दावा है कि फिलहाल कोई भी अमेरिकी बेस चालू हालत में नहीं है। इस वजह से अमेरिकी सेना को ईंधन और भोजन जैसी जरूरी चीजों के लिए क्षेत्र के बाहर के स्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
7 नवंबर 2026 तक यह संघर्ष जारी है। हालिया रिपोर्टों में केशम द्वीप पर मिसाइल हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ड्रोन को रोकने की खबरें सामने आई हैं।
सैन्य तनाव के बीच राजनयिक रास्ते अभी भी खुले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि कतर के अमीर द्वारा की गई मध्यस्थता के बाद अमेरिका, ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहा है।
कतर युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की कोशिशें जारी रखे हुए है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम शांति समझौता नहीं हो पाया है।
इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। विभाग ने ईरानी समर्थित समूहों से हमलों के बढ़ते खतरे और अमेरिकी अधिकारियों के लिए संभावित जोखिमों का हवाला दिया है।