सुरक्षा कारणों से खाड़ी देशों को छोड़ ओमान जा रहे ईरानी प्रवासी

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी कड़े नियमों के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले ईरानी नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। फरवरी 2026 में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच उपजे संघर्ष के बाद, कुवैत, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने ईरानी नागरिकों के लिए वीजा रिन्यूअल और निवास संबंधी नियमों को काफी सख्त कर दिया है। इस अस्थिरता के बीच, अब बड़ी संख्या में ईरानी प्रवासी अपने व्यापार और परिवार के साथ ओमान की ओर रुख कर रहे हैं।
खाड़ी देशों में बढ़ी सख्ती और सुरक्षा जांच
क्षेत्रीय तनाव का सबसे ज्यादा असर कुवैत में देखा गया है। जून 2026 में कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले के बाद, वहां की सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। सरकार ने दो ईरानी राजदूतों को 'पर्सोना नॉन ग्रेटा' घोषित करते हुए उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। इसके अलावा, कुवैत में ईरानी नागरिकों के निवास (residency) की भी गहन समीक्षा की जा रही है।
यही स्थिति यूएई और बहरीन में भी देखी जा रही है। हालांकि इन देशों ने बड़े पैमाने पर निर्वासन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, कई ईरानी प्रवासियों को उनके वीजा नवीनीकरण (visa renewal) में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दुबई और अबू धाबी के बैंकिंग और रेस्टोरेंट जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्रों में ईरानी व्यापारियों के ओमान जाने की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से देखी जा रही है।
ओमान क्यों बना प्रवासियों की पहली पसंद?
ओमान वर्तमान में इस पूरे क्षेत्रीय संकट के बीच एक सुरक्षित ठिकाने के रूप में उभर रहा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- तटस्थ रुख: अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में ओमान का तटस्थ रुख और ईरान के साथ उसके मजबूत राजनयिक संबंध इसे एक सुरक्षित विकल्प बनाते हैं।
- आसान वीज़ा नीतियां: ओमान ने 2026 में कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए हैं। अब संपत्ति के मालिकों और निवेशकों के लिए बिना प्रायोजक (sponsor-free) वाले 'ओनर वीज़ा' की सुविधा उपलब्ध है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र: फ्री ज़ोन और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) में निवास के अनुकूल नियमों ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
आंकड़ों के अनुसार, जून से अगस्त 2026 के बीच ओमान एकमात्र ऐसा GCC देश रहा है जहाँ भर्ती (recruitment) की मंजूरियों में वृद्धि दर्ज की गई है।
ओमान के स्थानीय बाजार पर पड़ता प्रभाव
ईरानी प्रवासियों के इस बड़े पलायन का असर ओमान के स्थानीय बाजार और अन्य प्रवासी समुदायों पर भी पड़ रहा है।
किराया और रियल एस्टेट में उछाल
मस्कट और सोहार जैसे शहरों में, जहाँ पारंपरिक रूप से दक्षिण एशियाई श्रमिक रहते थे, वहां अब साझा फ्लैट और स्टूडियो अपार्टमेंट के किराए में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
बैंकिंग और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा
ईरानी परिवारों द्वारा दुबई और अबू धाबी से अपना पूंजी (capital) मस्कट स्थानांतरित करने के कारण बैंकिंग लेनदेन के तरीकों में बदलाव आया है। साथ ही, रेस्टोरेंट क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ गई है।
सावधानी बरतें: ओमान सरकार ने श्रम निरीक्षण को कड़ा कर दिया है और 'ओमानइजेशन' नीति को बढ़ावा दे रहा है, जिसके तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए वर्क परमिट रिन्यूअल पर रोक लगा दी गई है। भारतीय प्रवासियों को सलाह दी जाती है कि वे केवल सरकारी लाइसेंस प्राप्त कार्यालयों का ही उपयोग करें और किराए या साझा बैंक खातों के संबंध में किसी भी समझौते से पहले पूरी जांच-पड़ताल कर लें।