Strait of Hormuz Conflict: ईरान और अमेरिका के तनाव से मछुआरों की रोजी-रोटी खतरे में, बढ़ी मुश्किलें.

Nura Basta28 August 20263 min read46 viewsWorld
Strait of Hormuz Conflict: ईरान और अमेरिका के तनाव से मछुआरों की रोजी-रोटी खतरे में, बढ़ी मुश्किलें.

ईरान के दक्षिणी तटीय शहरों में रहने वाले मछुआरों की जिंदगी पर बहुत बड़ा संकट आ गया है। Strait of Hormuz में चल रहे क्षेत्रीय संघर्ष और अमेरिका की सख्त पाबंदियों के कारण इन समुद्री कामगारों की रोजी-रोटी पूरी तरह से तबाह होने की कगार पर पहुंच गई है। अलजजीरा के रिपोर्टर Ferdia Carr के मुताबिक, बमबारी, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों, नौसेना की नाकाबंदी और ईंधन तथा उपकरणों के महंगे दामों ने इन लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

क्षेत्र में लगातार हमले और सुरक्षा का संकट

इस इलाके में तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है और हाल ही में कई खतरनाक घटनाएं सामने आई हैं। गत 27 अगस्त 2026 को एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर को निशाना बनाया, जिससे उसमें आग लग गई। इसके अलावा कुवैत के स्वामित्व वाले टैंकर AL SALAM II पर भी वाटरलाइन के ऊपर हमला हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 25 अगस्त को यह दावा किया था कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से सभी बारूदी लड़ाइयां और माइंस साफ कर दी गई हैं, लेकिन Joint Maritime Information Center (JMIC) ने 27 अगस्त को यह साफ किया कि नेविगेशन में बाधा अभी भी जारी है और माइन-रिस्क एक बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है।

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अमेरिकी पाबंदियों और आर्थिक संकट का असर

अमेरिकी नीतियों की वजह से यह आर्थिक संकट और ज्यादा गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 19 अगस्त को 'Economic D-Day' ऑपरेशन के ऐलान के बाद, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने 24 अगस्त को ईरान की शिपिंग कंपनियों पर और अधिक पाबंदियों का ऐलान किया। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री ने 27 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र में एक पत्र दाखिल किया और इन पाबंदियों को आर्थिक जबरदस्ती करार दिया। इसी बीच ईरान के उपराष्ट्रपति Mohammad Jafar Ghaempanah ने यह पुष्टि की कि 14 जुलाई से जारी अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी की वजह से पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल देश के अंदर नहीं आ पा रहा है, जिससे भारी घरेलू कमी पैदा हो गई है।

कूटनीतिक प्रयास और ईरान की कड़ी चेतावनी

इस स्थिति को शांत करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी तेजी से चल रही हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने 27 अगस्त को तेहरान का दौरा किया और इस समुद्री संकट पर चर्चा की। हालांकि, तनाव अभी भी चरम पर है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने 27 अगस्त को चेतावनी दी कि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की शर्तों पर तैयारी कर रहा है। इन शर्तों में नौसेना की नाकाबंदी को हटाना, पाबंदियों को वापस लेना और आर्थिक मुआवजा देना शामिल है। रेजाई ने यह भी चेतावनी दी कि नए अमेरिकी उपायों का समर्थन करने को 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने भी 27 अगस्त को अमेरिकी कदमों की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदायों के लिए यह भू-राजनीतिक उथल-पुथल एक खतरनाक दैनिक वास्तविकता बन चुकी है, जहां उन्हें या तो संघर्ष क्षेत्र में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है या फिर गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

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