ईरान की दो-टूक: अब्बास अराघची ने कूटनीति और सैन्य तैयारी दोनों पर दिया जोर

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि तेहरान बातचीत के रास्ते पर चलने से पीछे नहीं हटेगा, लेकिन अपनी रक्षा के लिए भी पूरी तरह तैयार है। हाल ही में तेहरान में विदेशी मिशनों को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि यदि किसी ने सैन्य विकल्प चुना, तो उसे पिछले संघर्षों से भी ज्यादा कड़ा और निर्णायक जवाब मिलेगा।
कूटनीति और संघर्ष की दोहरी नीति
ईरानी नेतृत्व की यह दो-ट्रैक नीति ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए सात दिवसीय संघर्ष विराम प्रस्ताव पर अमेरिका की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और क्षेत्रीय शत्रुता को रोकने की शर्तें शामिल हैं। मध्यस्थों के रूप में कतार और पाकिस्तान इस प्रक्रिया में भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि तेहरान को अमेरिकी प्रशासन के पिछले रवैये को लेकर गहरी आशंकाएं भी हैं।
अमरीकी रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने के बजाय और गहराता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष विराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए इसे लाचारी करार दिया है। वहीं, तेहरान में घरेलू दबाव भी कम नहीं है। संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने घोषणा की है कि जब तक इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की सात विशिष्ट शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद ही रहेगा। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी यह दोहराया है कि अमेरिका इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सभी विकल्प खुले हैं।
क्षेत्रीय हिंसा और सुरक्षा उपाय
हालिया घटनाओं ने इस भू-राजनीतिक संकट को और खतरनाक बना दिया है। ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर को निशाना बनाए जाने और रियाद में अरामको की एक सुविधा पर ड्रोन व मिसाइल हमले की खबरों ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। इन बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर अमेरिका ने सऊदी अरब और कतर में अतिरिक्त पैट्रियट एयर-डिफेंस सिस्टम तैनात कर दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।