फारस की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला, खार्ग द्वीप के पास मचा हड़कंप.

फारस की खाड़ी में शनिवार को एक बड़ी घटना सामने आई, जहां खार्ग द्वीप के पास खड़े एक छोटे ईरानी तेल टैंकर को अमेरिकी सेना की मिसाइल ने निशाना बनाया। इस अचानक हुए हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया है, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है और सभी क्रू मेंबर्स सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए।
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी Anadolu और ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Tasnim News से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना खार्ग द्वीप से लगभग छह नॉटिकल मील दूर हुई। तसनीम ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि वहां लंगर डालकर खड़े किए गए टैंकर पर अमेरिकी सेना की ओर से दागे गए करीब चार प्रोजेक्टाइल लगे, जिसके बाद तुरंत सुरक्षा उपायों को अपनाते हुए जहाज के क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
टैंकर को हुए नुकसान की जांच जारी
घटना के तुरंत बाद स्थानीय सूत्रों ने दावा किया कि इस हमले में कोई भी हताहत नहीं हुआ है, लेकिन संबंधित अधिकारियों की तरफ से फिलहाल टैंकर को पहुंचे नुकसान की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। विभिन्न एजेंसियां इस बात की बारीकी से जांच कर रही हैं कि आखिर यह हमला किन परिस्थितियों में हुआ और इससे जहाज को तकनीकी या ढांचागत रूप से कितना नुकसान उठाना पड़ा है।
अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि बाकी
इस पूरे मामले पर अमेरिकी अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है। यही वजह है कि टैंकर पर हुए इस कथित मिसाइल हमले से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां फिलहाल ईरानी मीडिया और वहां के स्थानीय सूत्रों के दावों पर ही आधारित हैं। आधिकारिक मोहर लगने के बाद ही स्थिति पूरी तरह से साफ हो पाएगी।
खार्ग द्वीप का रणनीतिक महत्व
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Kharg Island ईरान के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही नजरिए से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाका है। यह ईरान के प्रमुख कच्चे तेल निर्यात टर्मिनलों में शामिल है और देश के समुद्री तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा यहीं से संचालित होता है। इसी भारी रणनीतिक महत्व के कारण फारस की खाड़ी या उसके आस-पास के समुद्री क्षेत्रों में होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि का सीधा असर क्षेत्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने की आशंका हमेशा बनी रहती है, जिस पर दुनियाभर के जानकारों की नजर रहती है।