ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का बड़ा ऐलान, कहा- हमलावरों को तब तक रोकेंगे जब तक पछताना न पड़े।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने 8 सितंबर 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका देश तब तक आक्रामकता के खिलाफ डटा रहेगा जब तक कि हमलावरों को अपने किए पर पूरा पछतावा नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान हमेशा से शांति के पक्ष में रहा है और वह युद्ध का विरोध करता है क्योंकि देश की तरक्की और क्षेत्रीय शांति के लिए आपसी संघर्ष से बचना बहुत जरूरी है।
खाड़ी देशों में बढ़ता तनाव और होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा
ईरान के राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। ईरानी सुरक्षा अधिकारी Mohsen Rezaei ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि तेहरान खाड़ी क्षेत्र में एक प्रतिबंधित क्षेत्र लागू करने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत अमेरिका के आर्थिक प्रतिबंधों का जवाब देने के लिए Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद करने की धमकी भी दी गई है। अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों को रोकने और इस अहम समुद्री रास्ते से आने-जाने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आने के कारण स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई है।
खाड़ी देशों और सऊदी अरब पर हमलों की निंदा
एक तरफ जहां कूटनीतिक स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ Gulf Cooperation Council (GCC) यानी खाड़ी सहयोग परिषद ने ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए लगातार हमलों की कड़ी निंदा की है। जीसीसी ने इन हमलों को एक चरमपंथी और आपराधिक तरीका बताया है जिससे आम लोगों की जिंदगी और बुनियादी ढांचे को बड़ा खतरा पैदा हो गया है। यमन में सक्रिय सऊदी नीत गठबंधन के आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब के कई शहरों में हुए इन हमलों की वजह से अब तक 73 लोग घायल हो चुके हैं।
परमाणु गतिविधियों को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस बीच कूटनीति के मोर्चे पर भी ईरान की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। International Atomic Energy Agency (IAEA) यानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने ईरान की परमाणु तक पहुंच को लेकर एक औपचारिक चेतावनी जारी की है। मौजूदा हालात को देखते हुए पश्चिमी देश अब इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रमों के मामले को संयुक्त राष्ट्र यानी United Nations के पास भेजा जाए, जिससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है।