होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा हमला, ईरानी नाविक की मौत और गल्फ देशों में तनाव बढ़ा

रविवार, 13 सितंबर 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी नाविक की मौत का मामला सामने आया है। इस घटना ने खाड़ी देशों में खलबली मचा दी है और आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान के कश्म और हेंगाम द्वीपों के पास एक मर्चेंट जहाज पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें एक नाविक की जान चली गई और तीन लोग घायल हो गए।
आधिकारिक पुष्टि और शुरुआती हमला
ईरान के सरकारी टेलीविजन और कश्म के गवर्नर अमीर तैमूरी ने इस घटना की पुष्टि की है। यह हमला सुबह लगभग 5:00 बजे हुआ और इसे एक आतंकवादी हमला बताया गया है। ब्रिटिश मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने भी जलडमरूमध्य में एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल गिरने की पुष्टि की है, जिसके बाद वहां आग लगने और जहाज को खाली कराने की खबर सामने आई थी। इस तरह की घटनाओं से वहां काम करने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों में डर का माहौल बन गया है.
सऊदी अरब और लाल सागर में बढ़ते हमले
इस हमले के कुछ ही घंटों बाद, हूती ताकतों ने सऊदी अरब के शरौरा सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागने का दावा किया। इसके अलावा, जाज़ान में एक प्रोजेक्टाइल गिरने से दो सऊदी नागरिक घायल हो गए और एक मस्जिद को नुकसान पहुंचा। इराक की तरफ से आए ड्रोन के कारण सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को लगातार बंद रखना पड़ा है। लाल सागर के मोचा और मयुन द्वीप पर हूती बलों का कब्जा होने के बाद से हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं। सऊदी नीत गठबंधन के विमानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पिछले 48 घंटों में 129 हवाई हमले किए हैं। इन तमाम लड़ाइयों की वजह से करीब 46,000 लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जिनमें से 1,400 से अधिक लोग जिबूती भाग गए हैं।
राहत और कूटनीतिक बैठक
इन सभी तनावों के बीच ओमान में सोमवार को कूटनीतिक बैठक होने वाली है, जहां खाड़ी देशों के विदेश मंत्री ईरान के प्रतिनिधियों के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा करेंगे। क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं। बहरीन ने तब तक इसमें शामिल होने से मना कर दिया है जब तक तेहरान के साथ कूटनीतिक रिश्ते ठीक नहीं हो जाते। वहीं कतर ने अरब जमीन पर ईरानी हमलों और सऊदी ठिकानों पर हूती हमलों की निंदा की है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE लगातार ईरानी मिसाइलों को हवा में रोक रहा है। इन सब के बीच तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं, जिससे उड़ानों और गैस सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।