अमेरिका और इजरायल द्वारा सैन्य हमले की आशंका के चलते ईरान के नागरिकों में बढ़ा डर और बेचैनी
अमेरिका और इजरायल द्वारा सैन्य हमले की खबरों के बाद ईरान के नागरिकों में डर है। तनाव के बीच राजनयिक कोशिशें जारी हैं।

तेहरान: अमेरिका और इजरायल द्वारा आने वाले कुछ दिनों या हफ्तों में फिर से सैन्य हमले करने की योजना बनाने की खबरों के बाद ईरान के नागरिकों में भारी डर देखा जा रहा है। ओमान ऑब्जर्वर की 25 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने हालात को काफी नाजुक बना दिया है।
तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बैरक ने 23 अक्टूबर को संकेत दिया था कि ईरान पर सैन्य हमले जल्द ही दोबारा शुरू हो सकते हैं। इसी बीच, अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जे क्लेटन ने चेतावनी दी है कि ईरान ने विदेशों में अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने भी कहा कि यह संघर्ष एक साल और खिंच सकता है।
तनाव के बीच अमेरिकी विदेश विभाग ने 23 अक्टूबर को इजरायल के लिए अपनी यात्रा एडवाइजरी अपडेट की, जिसमें हूती विद्रोहियों से बढ़ते खतरों का जिक्र किया गया है। शनिवार 24 अक्टूबर को ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही ने साफ कर दिया कि अमेरिकी जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक अंतरिम राजनयिक समझौते के विफल होने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है और नई बातचीत की अपील की है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अगर कूटनीति काम नहीं आई, तो और सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि इस गतिरोध का कोई सैन्य समाधान नहीं है। इसके बावजूद, ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यदि अमेरिका और इजरायल ने हमले शुरू किए, तो वे समुद्र के नीचे बिछी संचार लाइनों और इंटरनेट केबलों को नुकसान पहुंचाएंगे।
क्षेत्रीय तनाव के बीच शनिवार को हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी, जिसे सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सफलतापूर्वक रोक लिया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू तेहरान में सत्ता परिवर्तन के मुद्दे पर चुनाव अभियान चला रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान, कतर, ओमान और मिस्र जैसे देश युद्ध को रोकने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहे हैं।