Saudi पर ड्रोन हमला, इराक के प्रधानमंत्री ने दिए जांच के आदेश और कहा जमीन का नहीं होगा गलत इस्तेमाल।

सऊदी अरब पर हुए अचानक ड्रोन हमलों के बाद अब मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है। इस गंभीर मामले पर इराक सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपनी कड़ी निंदा दर्ज कराई है और प्रधानमंत्री ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। गुरुवार सुबह 10 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया था जिससे वहां के तेल निर्यात और बुनियादी ढांचे पर असर पड़ा। इस घटना के बाद से ही खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और आम लोगों के मन में भी कई सवाल उठ रहे हैं।
सऊदी अरब के तेल पाइपलाइन पर हुआ था हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार ये ड्रोन हमले सऊदी अरब की मशहूर ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशनों पर हुए थे जो रियाद और मदीना के इलाकों में स्थित हैं। इन हमलों की वजह से कई लोग घायल हो गए और संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा जिसके चलते इस जरूरी मार्ग पर कामकाज को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। शुक्रवार 11 सितंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में इराक ने साफ किया कि वह किसी भी ऐसे कदम के खिलाफ है जो सऊदी अरब की शांति और सुरक्षा को खतरे में डाले। इराकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी जमीन का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं किया जाएगा।
इराक के प्रधानमंत्री ने दिए सख्त जांच के आदेश
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने एक तुरंत और जरूरी जांच बिठाने का आदेश दिया है ताकि हमले के पीछे छिपे असली गुनहगारों का पता लगाया जा सके। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इराकी सरकार ऐसी किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी जिससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़े या दूसरे देशों के साथ कूटनीतिक रिश्ते खराब हों। यह जांच ऐसे समय में हो रही है जब देश पर 30 सितंबर 2026 तक मिलिशिया समूहों को हथियार डालने की समयसीमा का दबाव है जिसका कई ईरान समर्थित गुट विरोध कर रहे हैं।
सऊदी अरब ने दिखाई सूझबूझ और संयम
अमेरिका और सऊदी अधिकारियों का मानना है कि इन हमलों के पीछे इराक के भीतर सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों का हाथ है जिन्होंने तकनीक और हथियारों से यह स्ट्राइक की। इसके बावजूद सऊदी अरब की सरकार ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की। सऊदी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के अनुरोध पर तत्काल सैन्य प्रतिक्रिया से बचा गया है। इस रोक का मकसद इराकी सरकार को भविष्य के ऐसे खतरों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का पूरा मौका देना है। हालांकि सऊदी अरब ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो वह अपने नागरिकों और जरूरी परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है।