इराक में US गठबंधन मिशन खत्म, प्रधानमंत्री ने किया ऐतिहासिक ऐलान

Gautam Sahu30 September 20262 min read0 viewsWorld
इराक में US गठबंधन मिशन खत्म, प्रधानमंत्री ने किया ऐतिहासिक ऐलान

इराक ने अपने इतिहास के एक बड़े अध्याय को समाप्त कर दिया है। इराकी प्रधानमंत्री अली फलेह अल-ज़ैदी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ISIL के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय गठबंधन का मिशन अब समाप्त हो गया है। 30 सितंबर, 2026 को हुई इस घोषणा के साथ ही 12 साल से चल रहा सैन्य अभियान अब इतिहास बन गया है।

संप्रभुता की ओर बढ़ते कदम

बगदाद में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान, प्रधानमंत्री अल-ज़ैदी ने कहा कि इराक अब एक "नए चरण" में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा अब पूरी तरह से इराकी सुरक्षा बलों के नियंत्रण में है। इस ऐतिहासिक बदलाव को चिह्नित करने के लिए, प्रधानमंत्री ने 1 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर "संप्रभुता दिवस" (Sovereignty Day) के रूप में घोषित किया है।

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प्रधानमंत्री के अनुसार, यह बदलाव इराक की मजबूत संस्थाओं, सशस्त्र बलों की तत्परता और एक एकजुट राष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रिया का परिणाम है।

अमेरिका ने भी दी पुष्टि

अमेरिकी रक्षा विभाग और यू.एस. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी 'ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व' के समापन की औपचारिक पुष्टि की है। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने बताया कि यह विदाई युद्धकालीन गठबंधन मिशन से हटकर एक द्विपक्षीय सुरक्षा संबंध में परिवर्तन है। अब यह रिश्ता मुख्य रूप से खुफिया जानकारी साझा करने और लक्षित प्रशिक्षण पर केंद्रित होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रक्रिया को व्यवस्थित बताते हुए प्रधानमंत्री अल-ज़ैदी के नेतृत्व की सराहना की है। 30 सितंबर तक सभी अमेरिकी सेनाएं और सैन्य उपकरण इराक छोड़ चुके हैं, जिसमें अर्बिल स्थित एयर बेस को खाली करना भी शामिल है।

बड़ी चुनौतियां और सुरक्षा संबंधी चिंताएं

भले ही इस बदलाव का जश्न मनाया जा रहा है, लेकिन इराक के सामने अभी भी कई कठिन चुनौतियां मौजूद हैं। सुरक्षा सलाहकार कासिम अल-अराजी ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन और उसके सहयोगियों के साथ खुफिया सहयोग जारी रहेगा, लेकिन यह आपसी सम्मान पर आधारित होगा।

प्रमुख चुनौतियां:

  • मिलिशिया का मुद्दा: प्रधानमंत्री अल-ज़ैदी ने ईरान समर्थित मिलिशिया के निशस्त्रीकरण की समय सीमा को बढ़ाकर जून 2027 कर दिया है, क्योंकि ये समूह अभी भी राज्य के नियंत्रण से बाहर काम कर रहे हैं।
  • सुरक्षा शून्यता का डर: विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी बलों की वापसी से सुरक्षा में कमी आ सकती है।
  • क्षेत्रीय तनाव: इराक को अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े विभिन्न समूहों के बीच चल रहे क्षेत्रीय तनावों के बीच खुद को संतुलित करना होगा।

इराक के लिए यह एक गौरवशाली क्षण है, लेकिन आने वाले समय में देश की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी अपनी सुरक्षा एजेंसियां इन जटिल चुनौतियों का सामना कैसे करती हैं।

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