ईरान की IRGC ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए बंद किया, तेल की कीमतें 110 डॉलर के पार पहुंचीं

तेहरान: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के जहाजों के लिए आधिकारिक तौर पर बंद कर दिया है। यह फैसला दो सुपरटैंकरों के समुद्री सुरंगों से टकराकर आग में घिर जाने के बाद लिया गया है। इन दोनों टैंकरों में दो-दो मिलियन बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लदा हुआ था।
ईरानी सरकारी मीडिया और IRGC का आरोप है कि इन जहाजों ने अपने ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर रखे थे और वे अमेरिकी सेना की मदद से यहां से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। IRGC ने दावा किया है कि अब होर्मुज के पूर्व, अरब सागर और ओमान की खाड़ी पर उनका पूरा नियंत्रण है और यहां से गुजरने वाले हर जहाज को ईरानी सेना से तालमेल करना होगा।
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि एक टैंकर पर छोटी नाव से RPG हमला भी किया गया। इसके अलावा सऊदी अरब के अल जुबैल तट और यमन के अल मुकल्ला के पास भी जहाजों पर हमले हुए, जहां बंदूकधारियों ने पांचवें जहाज पर फायरिंग की। पिछले कुछ हफ्तों में इस इलाके में हमलों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और अब तक करीब एक दर्जन जहाजों को निशाना बनाया गया है।
इस तनाव के कारण व्यावसायिक ट्रैफिक गिरकर सामान्य स्तर के केवल 2 प्रतिशत रह गया है। जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह जो युद्ध से पहले 17 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, अब घटकर 9 से 12 मिलियन बैरल के बीच रह गया है। यह पूरा विवाद अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का हिस्सा है, जो 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था।
ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, ओमान और कुवैत जैसे देशों के ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। पिछले 230 दिनों से यह जलमार्ग प्रभावी रूप से अवरुद्ध है। इसी हफ्ते दो मालवाहक जहाज डूब गए, जो मार्च के बाद पहली बार हुआ है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इन कदमों का मकसद 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वाशिंगटन पर दबाव बनाना है।
आर्थिक मोर्चे पर इसका बड़ा असर दिखा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 16 अक्टूबर को 109.86 डॉलर रही और ट्रेडिंग के दौरान यह 110 डॉलर को छू गई, जो युद्ध से पहले के 72 डॉलर के मुकाबले 50 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं WTI क्रूड 101.41 डॉलर पर पहुंच गया। खाड़ी देशों के निर्यातकों को अब लाल सागर के रास्ते या जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के कारण अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है।
इस क्षेत्र में काम करने वाले लाखों भारतीय, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और फिलिपीन नागरिकों को बढ़ती महंगाई और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, यमन में हूती बलों ने सऊदी अरब पर हमले तेज कर दिए हैं। 1 अक्टूबर से रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर करीब 20 हमले हुए हैं, जिनमें भारतीय, बांग्लादेशी, पाकिस्तानी और अमेरिकी नागरिकों समेत 17 लोगों की मौत हुई और 330 से ज्यादा घायल हुए।
एयरपोर्ट को 17 अक्टूबर रात 21:00 UTC तक बंद रखा गया है। हूतियों ने अदन के राष्ट्रपति महल और अदन एयरपोर्ट पर भी हमले किए हैं, जिनमें पांच लोगों की जान गई। वहीं ताइज़ के पास जारी लड़ाई की वजह से मानवीय सहायता पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। सऊदी अरब और यूएई खतरों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि मिस्र और फ्रांस ने समर्थन दिया है और ओमान मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।