हॉर्मुज और बाब अल-मंदाब में अमेरिका को IRGC की चेतावनी, कहा- भारी नुकसान उठाएगा वॉशिंगटन

IRGC कमांडर इस्माइल गानी ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एकजुट प्रतिरोध मोर्चे की चेतावनी दी है। जानिए क्या है पूरा मामला।

Gautam Sahu4 November 20262 min read0 viewsWorld
हॉर्मुज और बाब अल-मंदाब में अमेरिका को IRGC की चेतावनी, कहा- भारी नुकसान उठाएगा वॉशिंगटन

तेहरान: IRGC कुड्स फोर्स के कमांडर मेजर जनरल इस्माइल गानी ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक एकीकृत 'प्रतिरोध' मोर्चे के तैयार होने का ऐलान किया है। गानी ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी है कि वह इस मोर्चे की सामूहिक क्षमताओं को कम न आंके। उन्होंने कहा कि यह प्रतिरोध कई भौगोलिक क्षेत्रों में एकीकृत है और इसकी रणनीतिक गहराई केवल हथियारों की मारक क्षमता तक सीमित नहीं है।

क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर बात करते हुए गानी ने साफ तौर पर कहा कि अमेरिका को अब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य दोनों जगहों पर एक एकजुट मोर्चे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आगाह किया कि अगर अमेरिका अपना 'जुए जैसा व्यवहार' जारी रखता है, तो यह गठबंधन उसे भारी नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार है।

कमांडर गानी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के साथ संघर्ष में धकेलने के लिए गुमराह किया है। उन्होंने इस पूरी भागीदारी को अमेरिका के लिए एक बड़ी रणनीतिक विफलता करार दिया।

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गानी के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य उपस्थिति बढ़ाकर अमेरिका ने अनजाने में 'प्रतिरोध मोर्चे' को अपने अभियानों का विस्तार करने और बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य में लागत थोपने के लिए उकसाया है। यह बयान क्षेत्र में पिछले 48 घंटों के दौरान हुई तीव्र सैन्य गतिविधियों के बाद आया है।

जानकारी के अनुसार, 2 और 3 नवंबर 2026 के बीच अमेरिका ने बंदर अब्बास और केशम द्वीप के पास ईरानी ठिकानों पर रक्षात्मक हमले किए थे। ये हमले अमेरिकी संपत्तियों के खिलाफ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के इस्तेमाल के जवाब में किए गए थे।

इन सैन्य तनावों के बीच, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों को रोकने के बदले ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी हटाने के लिए बैक-चैनल बातचीत चल रही है। ईरान ने कुछ शर्तों के पूरा होने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए 'दो दिवसीय योजना' पर सार्वजनिक रूप से चर्चा की है। वहीं, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) इन महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग कर रही है।

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