होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा समुद्री हमला, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने टोगो के टैंकर को बनाया निशाना.

फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में तनाव एक बार फिर से काफी बढ़ गया है जब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक बड़े समुद्री ऑपरेशन को अंजाम दिया। गुरुवार रात और शुक्रवार सुबह के बीच हुई इस घटना में टोगो के झंडे वाले एक उत्पाद टैंकर Trend को निशाना बनाया गया, जिससे जहाज पर भीषण आग लग गई। इस पूरी घटना के बाद से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासी नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरी हो गई हैं, क्योंकि इस समुद्री रास्ते से भारत और अन्य एशियाई देशों के लिए भी ईंधन की आवाजाही होती है।
IRGC का दावा और अमेरिका पर लगाए गए गंभीर आरोप
ईरान के आधिकारिक सैन्य बलों यानी IRGC ने दावा किया कि यह जहाज अवैध तरीके से पानी के रास्ते को पार कर रहा था और उनका आरोप है कि अमेरिकी सेना ने इस जहाज को जानबूझकर इस रास्ते पर आने के लिए उकसाया और धोखा दिया। IRGC ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा कि उनके बल इस जलमार्ग पर पूरी तरह से नियंत्रण रखते हैं और अगर कोई भी जहाज बिना अनुमति के इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे तबाह कर दिया जाएगा। इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया ने यह पुष्टि की है कि हमले के बाद टैंकर में आग लग गई थी, हालांकि रियर एडमिरल अली अजमाई ने साफ कर दिया कि उनकी नजर इस पूरे क्षेत्र पर बनी हुई है।
ब्रिटिश मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की रिपोर्ट
दूसरी तरफ, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने एक अलग सुरक्षा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ओमान के खासब शहर से लगभग 16 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में एक समुद्री जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल यानी गोले से हमला किया गया। इस हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी जिसे बाद में बुझा लिया गया और गनीमत यह रही कि जहाज पर सवार सभी कर्मचारी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि UKMTO द्वारा बताई गई घटना और IRGC का दावा किया गया हमला एक ही जहाज पर हुआ था या नहीं। प्रभावित जहाज Trend एक 7,119-dwt का उत्पाद वाहक है जिसका प्रबंधन संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से किया जाता है।
क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक बैठकों पर असर
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक हालात पहले से ही काफी गर्म चल रहे हैं। हाल ही में सऊदी अरब ने मक्का के दक्षिण में एक ड्रोन को हवा में ही नाकाम करने की बात कही थी, जिसके बाद रियाद प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा कि पवित्र शहर की सुरक्षा उनके लिए एक बड़ी लाल रेखा यानी रेड लाइन है। हालांकि इसके उलट हूती विद्रोहियों ने मक्का को निशाना बनाने से साफ इनकार किया है और UAE ने इस हमले के प्रयास की कड़ी निंदा की है। बढ़ते तनाव के कारण ओमान में ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक बैठकों को फिलहाल टाल दिया गया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य की कानूनी स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बीच गंभीर मतभेद बने हुए हैं। इसके साथ ही बहरीन ने भी तेहरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत में शामिल होने से पूरी तरह मना कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और कच्चे तेल की कीमतें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि उन्हें ईरानी शासन को लेकर एक बड़ा फैसला लेना है और वह अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में खाड़ी सहयोग परिषद यानी GCC के नेताओं के साथ बैठक करने वाले हैं। अमेरिकी सरकार ने इसके लिए एक खास पाबंदी के तहत ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका आने की अनुमति दे दी है। इन सबके बीच शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही थीं। तेहरान की सड़कों पर संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक की सबसे बड़ी रैली देखी गई जिसमें लाखों की संख्या में लोगों ने सरकार के समर्थन में प्रदर्शन किया। समुद्री रास्ते में फैल रही इस अस्थिरता को देखते हुए अमेरिकी नौसेना ओमान के पास कमर्शियल जहाजों को लगातार एस्कॉर्ट कर रही है, जबकि इटली बाब अल-मदब के पास अपने बलबूते पर जहाजों की सुरक्षा करने की योजना बना रहा है और दक्षिण कोरिया भी अदन की खाड़ी में अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।