बाब अल-मंताब के पास सुरंग खोद रहे ईरान के एक्सपर्ट्स, मोखा बंदरगाह पर मंडराया बड़ा खतरा.

लाल सागर के बेहद अहम और सामरिक रूप से संवेदनशील माने जाने वाले इलाके में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। फ्रांस की समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 सितंबर 2026 को यह जानकारी सामने आई है कि ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के विशेष विशेषज्ञों ने मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंताब जलडमरूमध्य के पास पहाड़ी इलाकों में सुरंगों की खुदाई का काम शुरू करवा दिया है और वे खुद इसकी निगरानी कर रहे हैं। इस पूरी गतिविधि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर दौड़ गई है क्योंकि यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है जहां से रोजाना दुनिया भर के जहाज गुजरते हैं।
ईरान के सैन्य विशेषज्ञों ने किया दौरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, आईआरजीसी के इन विशेष विशेषज्ञों ने 17 सितंबर से 18 सितंबर 2026 के बीच इस पहाड़ी क्षेत्र का दौरा किया था। उनका मुख्य मकसद चल रहे निर्माण कार्यों की देखरेख करना और मोखा के पास तथा दक्षिणी लाल सागर में स्थित जुकर द्वीप पर रडार सिस्टम लगाने की योजनाओं पर चर्चा करना था। यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया है जब ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने हाल ही में 10 से 11 सितंबर 2026 के आसपास मोखा शहर पर अपना नियंत्रण हासिल कर लिया था। सैन्य सूत्रों का ऐसा मानना है कि यह सारी कार्रवाई इस महत्वपूर्ण समुद्री चोकपोंग पर अपनी पकड़ मजबूत करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिससे आने वाले दिनों में सुरक्षा हालात और अधिक बिगड़ सकते हैं।
काहबूब पहाड़ों के पास तेज हुई झड़पें
हुथी लड़ाकों और सऊदी समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच काहबूब पहाड़ों के पास भयंकर झड़पों की खबरें लगातार आ रही हैं, जो इस जलडमरूमध्य के ठीक ऊपर एक अहम रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। इस पूरे गंभीर हालात को देखते हुए 18 सितंबर 2026 को यमन के आंतरिक मंत्री Major General Ibrahim Haidan ने एक औपचारिक चेतावनी जारी की है। उन्होंने अपने बयान में साफ तौर पर कहा कि ईरान हूथी विद्रोहियों के जरिए इस क्षेत्र में लंबे समय तक अपना सैन्य प्रभाव जमाने की फिराक में है। इसके लिए वहां बंकर, सुरंगें और मिसाइल तथा ड्रोन के लिए जरूरी सैन्य ठिकाने तैयार किए जा रहे हैं। मंत्री महोदय ने विशेष रूप से मायुन द्वीप, जुकर और हनीश द्वीपों का जिक्र किया जिन्हें एक नए सैन्य तंत्र के तहत जोड़ा जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाब अल-मंताब जलडमरूमध्य की सुरक्षा सिर्फ स्थानीय मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
कूटनीतिक हलचल और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
इस संकट से निपटने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी बैठकों और वार्ताओं का दौर तेजी से चल रहा है। 11 सितंबर 2026 को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने कथित तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump से अपील की थी कि वे जलडमरूमध्य की तरफ हूथी ताकतों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए उनके ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई करें। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र के यमन दूत Hans Grundberg ने हूथी विद्रोहियों की इन ताजा सैन्य गतिविधियों को चल रहे संघर्ष का एक नया और बेहद खतरनाक चरण करार दिया है। इन तमाम घटनाओं से खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नींद उड़ गई है क्योंकि इस रास्ते पर किसी भी तरह का कब्जा वैश्विक व्यापार को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।