IRGC की धमकी से कुवैत और बहरीन में खलबली, अमेरिकी फौजों को हटाने की उठी मांग.

Aanya2 September 20263 min read51 viewsKuwait
IRGC की धमकी से कुवैत और बहरीन में खलबली, अमेरिकी फौजों को हटाने की उठी मांग.

खाड़ी देशों में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के राजनीतिक उप-प्रमुख जनरल यादोल्लाह जवानी ने अरब देशों को सीधी चेतावनी दी है। यह बड़ी घटना 2 सितंबर 2026 को सामने आई जब ईरान की तरफ से कहा गया कि कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों से अमेरिकी फौजों को तुरंत बाहर निकाला जाए। ईरान का साफ कहना है कि अगर इन देशों की जमीन का इस्तेमाल अमेरिका द्वारा फौजी गतिविधियों के लिए किया गया, तो ईरान उन पर तगड़ा हमला करेगा। इस स्थिति से वहां रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, खासकर वे भारतीय जो इन खाड़ी देशों में रहकर अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं।

क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य टकराव की पूरी कहानी

क्षेत्र में चल रहे इस भारी तनाव के पीछे हाल ही में हुए कई सैन्य हमले हैं। ईरानी बलों ने जॉर्डन में प्रिंस हसन एयरबेस और एक अमेरिकी मरीन बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, और बहरीन में अमेरिकी सेना के एयरबेस पर ड्रोन से हमला किया गया था। इसके अलावा इराक के एर्बिल में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। जॉर्डन की सेना ने जानकारी दी कि उन्होंने आसमान में ही 10 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया था। वहीं, बहरीन के अधिकारियों ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने आने वाले ड्रोन्स को हवा में ही तबाह कर दिया। कुवैत के प्रशासन ने भी माना कि उनके सुरक्षा तंत्र को इन खतरों से निपटने के लिए पूरी तरह सक्रिय करना पड़ा था।

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अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज

यह पूरा विवाद 1 सितंबर को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM द्वारा किए गए हमलों के बाद और भड़क गया, जिसमें अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस, रडार, समुद्री और कम्युनिकेशन ठिकानों को निशाना बनाया था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर ईरान की तरफ से हमले रोके नहीं गए, तो उसे बहुत भारी कीमत चुकानी होगी। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस ईरानी आक्रामकता के पीछे आर्थिक दबावों का जिक्र किया है। दूसरी तरफ, ईरान के सशस्त्र बलों के केंद्रीय मुख्यालय ने अमेरिकी सेना पर और अधिक विनाशकारी हमले करने की कसम खाई है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद-बागेर गालिबफ ने घोषणा की है कि जब तक अमेरिका अपने वादों को पूरा नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाएगा।

नागरिकों की मौत और आगे का बड़ा खतरा

इस बीच सीरिक, ईरान में एक कथित अमेरिकी मिसाइल हमले में एक बच्चे समेत कम से कम चार आम नागरिकों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इस घटना को युद्ध अपराध करार दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा है कि उनकी सेना ने वॉशिंगटन के लिए कड़े सबक तैयार किए हैं। तेहरान विश्वविद्यालय के विश्लेषक मोहम्मद एस्लाम का मानना है कि इन लगातार बढ़ते हमलों से यह संकेत मिलता है कि ईरान अमेरिका और इजराइल दोनों के साथ किसी बड़े टकराव के लिए पूरी तरह तैयार बैठा है। इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार और खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय समुदाय की भी गहरी नजर है, क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध का सीधा असर वहां के जनजीवन और प्रवासी कामगारों पर पड़ता है।

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