जॉर्डन के अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान का मिसाइल हमला, अमेरिका ने ईरान पर किया जोरदार पलटवार

मध्य पूर्व में तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य बैरकों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला करने का दावा किया। यह घटना 1 सितंबर 2026 की है, जिसे IRGC ने punishment of the aggressor ऑपरेशन का नाम दिया और एक पछतावा करने वाला जवाब बताया। इस हमले के बाद अमेरिका की तरफ से भी तुरंत प्रतिक्रिया सामने आई और दोनों देशों के बीच हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं।
मिसाइल हमलों पर जॉर्डन और अमेरिका का अलग-अलग बयान
IRGC का दावा था कि इस हमले में अमेरिकी सेना को भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और उनके लड़ाकू विमानों तथा हेलीकॉप्टरों की सुविधा वाले ठिकाने तबाह हो गए हैं। जिन ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई उनमें Camp Titin, King Hussein Airbase और Azraq Airbase शामिल थे। हालांकि जॉर्डन के सैन्य अधिकारियों ने इस दावे से पूरी तरह इनकार किया। जॉर्डन की सेना ने बताया कि उस दिन उनके देश के आसमान में आठ मिसाइलें आई थीं, लेकिन एयर डिफेंस ने उन सभी को हवा में ही नाकाम कर दिया। जॉर्डन में किसी भी तरह के जान या माल का नुकसान नहीं हुआ, हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर मफर्राफ और अकाबा इलाकों में सायरन बजाए गए थे।
अमेरिका सेंट्रल कमांड की कार्रवाई और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी
यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने 1 सितंबर 2026 को ईरान के अंदर IRGC के ठिकानों पर जवाबी सैन्य कार्रवाई की। यह हमले लारक द्वीप और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास किए गए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि यह कार्रवाई उन खतरों को रोकने के लिए थी जब IRGC के लोग होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहे थे। अमेरिका ने साफ किया कि लारक द्वीप पर किया गया यह हमला कोई आक्रामकता नहीं बल्कि समुद्री सुरक्षा बचाने के लिए उठाया गया एक सीमित कदम था। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस जवाबी कार्रवाई को बड़ा और ताकतवर बताया और चेतावनी दी कि अगर ईरान ने आगे कोई भी हरकत की तो उसे बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कदमों से ईरान का नामोनिशान खतरे में पड़ जाएगा।
खाड़ी देशों में सुरक्षा अलर्ट और प्रवासियों पर असर
इस खतरनाक सैन्य टकराव के बाद जॉर्डन, ओमान, कतर और बहरीन में स्थित अमेरिकी दूतावासों ने अपने नागरिकों और वहां रहने वाले लोगों के लिए औपचारिक सुरक्षा चेतावनी जारी कर दी है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और अन्य कामगारों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है। सुरक्षा अलर्ट जारी होने के बाद से लोग अपने काम और यात्रा को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं। खाड़ी क्षेत्र में इस तरह के तनाव से वहां के माहौल पर असर पड़ता है और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह मुस्तैद रहना पड़ रहा है ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।