हॉर्मुज जलडमरुमध्य में IRGC ने किया बड़ा सैन्य अभियान, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा

फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व के इलाकों में तनाव एक बार फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स (IRGC) की नौसेना ने 8 सितंबर 2026 को हॉर्मुज जलडमरुमध्य में एक नए सैन्य अभियान को अंजाम दिया। IRNA News Agency की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि वे क्षेत्रीय नियंत्रण को और मजबूत कर रहे हैं। इस बढ़ते तनाव का असर वहां काम करने वाले प्रवासियों और आम लोगों की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है, जिससे हर कोई चिंता में है।
ईरान का कड़ा रुख और सैन्य ताकत का प्रदर्शन
IRGC के डिप्टी कमांडर मेजर जनरल मोस्तफा इजादी ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं, जिनमें IRGC, सेना और कानून प्रवर्तन बल शामिल हैं, इस रणनीतिक जलमार्ग और दक्षिणी तटीय क्षेत्रों पर पूरी तरह से नियंत्रण बनाए हुए हैं। इसके साथ ही, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने आने वाले दिनों में फारस की खाड़ी तक फैलने वाले एक नए 'प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र' को बनाने की घोषणा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस इलाके में आने वाले जहाजों पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएंगे। रेजाई ने यह भी दावा किया कि ईरान ने हाल ही में एक अमेरिकी युद्धपोत के ठीक ऊपर अपनी नई एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जिसके बाद अमेरिकी जहाजों को वहां से पीछे हटना पड़ा।
राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में धमाके
हाल ही में तेहरान, बंदर अब्बास और केशम द्वीप पर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर संघर्ष विराम तोड़ने का आरोप लगाया है। देश के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान तब तक हमलावरों का विरोध करता रहेगा जब तक वे पूरी तरह से पछतावे की स्थिति में नहीं आ जाते। दूसरी ओर, अमेरिका का सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM इस इलाके में लगातार कड़ी नौसैनिक नाकेबंदी लागू किए हुए है। CENTCOM की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्री नियमों का पालन कराने के लिए उन्होंने 7 सितंबर तक 94 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला, तीन जहाजों को निष्क्रिय किया और दो जहाजों पर बोर्डिंग की कार्रवाई की।
लगातार झड़पों से खाड़ी देशों में चिंता
यह ताजा तनाव पिछले कुछ दिनों से चल रही उन घटनाओं के बाद आया है जिनमें IRGC ने अमेरिकी विमानवाहक पोतों और एक विध्वंसक पर हमले का दावा किया था। इसके जवाब में अमेरिका ने भी 5 सितंबर को ईरान के तीन कच्चे तेल के जहाजों पर हमले किए थे। ईरान की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी ने 7 सितंबर को चेतावनी दी थी कि उनकी सेना जरूरत पड़ने पर वाशिंगटन की ताकतों को जमीन पर गिराने के लिए पूरी तरह तैयार है। खाड़ी के इस हालात पर भारत से आने-जाने वाले यात्रियों और वहां रह रहे प्रवासियों की भी पैनी नजर है, क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध जैसे हालात से उड़ानों और व्यापार पर सीधा असर पड़ता है।