IRGC Spokesperson Questions US Intentions Amid Escalating Tensions With Iran

Gautam Sahu4 October 20262 min read0 viewsWorld
IRGC Spokesperson Questions US Intentions Amid Escalating Tensions With Iran

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और इस बीच तेहरान और वाशिंगटन के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। हाल ही में, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहिब्बी ने अमेरिकी सैन्य अभियानों के उद्देश्यों पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह संघर्ष वास्तव में ईरान के खिलाफ है या फिर अमेरिकी जनता के लिए एक आर्थिक संकट बन चुका है?

हुसैन मोहिब्बी ने अमेरिका में बढ़ती महंगाई, नए सैन्य बलों की तैनाती पर होने वाले भारी खर्च और अमेरिकी तेल रिजर्व में हालिया गिरावट का हवाला दिया। उनका मानना है कि इन तमाम फैसलों से अमेरिकी नागरिकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इस तीखे बयान से पहले भी उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व को तेहरान की शर्तों को स्वीकार करने की चेतावनी दी थी।

राजनयिक और सामरिक मोर्चे पर तनाव

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क्षेत्रीय संकट के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया है कि इस गतिरोध का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने न्याय और निष्पक्षता पर आधारित बातचीत का समर्थन किया है। हालांकि, दूसरी ओर संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने कड़ा रुख अपनाते ہوئے कहा है कि जब तक इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की सात विशिष्ट शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद रखा जाएगा।

सैन्य तैयारियों को आगे बढ़ाते हुए ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने ईरान की मिसाइल क्षमता के दायरे और गति को बढ़ाने के प्रयासों की घोषणा की है, ताकि ईरानी तट के पास तैनात अमेरिकी बलों का मुकाबला किया जा सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास 'आसान तरीका या कठिन तरीका' चुनने का विकल्प है, जबकि पेंटागन सभी रणनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है।

क्षेत्रीय स्थिरता और कतर-पाकिस्तान की मध्यस्थता

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अप्रत्यक्ष वार्ताओं में प्रतिबंधों को हटाने को मुख्य प्राथमिकता बताया है, जिसमें कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। इसके साथ ही आंतरिक सुरक्षा को लेकर भी सख्ती बरती जा रही है, जहां खुफिया मंत्रालय ने अमेरिका और इजराइल से जुड़े होने के आरोप में 31 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बीच, सऊदी अरब में अरामको सुविधाओं पर हालिया हमलों की जिम्मेदारी यमन के हूती विद्रोहियों ने ली है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर और अधिक सवाल खड़े हो गए हैं।

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