ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड नेormuz जलडमरूमध्य में अमेरिकी ड्रोन पकड़ने का किया फिर से दावा

तेहरान। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने एक बार फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका का एक पानी के अंदर चलने वाला ड्रोन पकड़े जाने का बड़ा दावा किया है। इस बार ईरानी सेना ने पकड़े गए उपकरण की पहचान Mk 18 Mod 2 Kingfish के रूप में की है, जिसे पहले रिपोर्ट में REMUS 600 कहा गया था। इस घटना के बाद से खाड़ी देशों में समुद्री सुरक्षा को लेकर हलचल तेज हो गई है और आम लोगों के बीच भी इस बात की चर्चा हो रही है कि रणनीतिक जलमार्गों में तनाव किस तरह बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के माध्यम से, IRGC के प्रवक्ता सेकेंड ब्रिगेडियर जनरल Hossein Mohebbi ने इस बात की पुष्टि की कि उनकी नौसेना ने अमेरिका के इस आधुनिक ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल यानी AUV को अपने कब्जे में ले लिया है। अपने आधिकारिक बयान में ईरानी सेना ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल खुला नहीं बल्कि अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों के लिए उनका एक शिकारगाह बन चुका है। ईरान का यह भी कहना है कि यह केवल एक पकड़ा गया उपकरण नहीं है, बल्कि उनके लिए तकनीक और खुफिया जानकारी का एक बड़ा खजाना हाथ लगा है जिसकी कीमत लाखों डॉलर में है।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का किया गया इस्तेमाल
ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB पर प्रसारित एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह पूरा ऑपरेशन एक बहुत ही सुनियोजित और जटिल तरीके से अंजाम दिया गया। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने आरोप लगाया कि यह अमेरिकी सेना का दूसरा सबसर्फ़र था जो इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में जासूसी करने के इरादे से घूम रहा था। ईरान की नौसेना ने अपनी सैन्य खुफिया निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का इस्तेमाल करके इस अत्याधुनिक अमेरिकी ड्रोन को अपने जाल में फंसा लिया। सैन्य जानकारों के अनुसार इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से काफी संवेदनशील मानी जाती हैं।
विशेषज्ञों को सौंपा गया पकड़ा गया उपकरण
IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, पकड़े गए इस सबमर्सिबल यानी पनडुब्बी जैसे दिखने वाले ड्रोन को अब सेना के विशेष तकनीकी विशेषज्ञों को सौंप दिया गया है। विशेषज्ञ अब इस सिस्टम का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इसके अंदर मौजूद सभी डेटा और खुफिया जानकारियों को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके। ईरान की नौसेना ने इस दौरान अपनी पुरानी और सख्त स्थिति को एक बार फिर दोहराते हुए साफ कर दिया है कि होर्मुज जलमार्ग पर उनका कड़ा पहरा है। उनका कहना है कि वे इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में किसी भी तरह की अनाधिकृत आवाजाही या खतरनाक गतिविधियों के खिलाफ बेहद कड़ी कार्रवाई लगातार जारी रखेंगे ताकि देश की समुद्री सीमाओं की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।