Strait of Hormuz में अमेरिका का MQ-9 ड्रोन ईरान ने गिराया, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव और चिंता.

फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं क्योंकि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिकी वायु सेना के एक आधुनिक ड्रोन को मार गिराया है। यह बड़ी घटना 31 अगस्त 2026 को हुई जब एक अमेरिकी MQ-9 Reaper ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ान भर रहा था। ईरानी सेना ने एक आधुनिक और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करके इस ड्रोन को निशाना बनाया जो बाद में सीधे फारस की खाड़ी में जा गिरा। इस घटना के बाद से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं क्योंकि इस इलाके से रोजमर्रा का कारोबार और आवाजाही जुड़ी हुई है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद भड़का विवाद
यह पूरी सैन्य कार्रवाई अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पीछे एक दिन पहले यानी 30 अगस्त 2026 को हुआ अमेरिकी हमला मुख्य वजह था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने लारक द्वीप पर एक सीमित और सटीक सैन्य कार्रवाई की थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि यह कदम ईरानी ताकतों द्वारा पानी के रास्ते में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगे बिछाने के आसन्न खतरे को रोकने के लिए उठाया गया था। दूसरी तरफ ईरानी अधिकारियों ने इस अमेरिकी हमले को सीधा आक्रामकता और हमला करार दिया। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार लारक द्वीप पर हुए इस हमले में लड़ाकों और आम नागरिकों समेत कुल 3 लोगों की जान चली गई जिसके बाद ईरान ने इसका कड़ा जवाब देने का फैसला किया।
जॉर्डन और UAE के एयरबेस पर हुए हमले
लारक द्वीप पर हुए हमले के जवाब में IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में स्थित किंग हुसैन और अल-अजराक एयरबेस के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के अल मिनहड एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। जॉर्डन के प्रशासन ने पुष्टि की कि उनके देश के ऊपर आसमान में कुल 8 मिसाइलों को रोक लिया गया था। वहीं दूसरी तरफ UAE रक्षा मंत्रालय ने औपचारिक रूप से इस बात से पूरी तरह इनकार किया कि उनके अल मिनहड ठिकाने को किसी भी तरह से निशाना बनाया गया था। इस क्षेत्र में इस तरह की सैन्य गतिविधियों से वहां काम करने वाले भारतीय प्रवासियों की धड़कने तेज हो गई हैं क्योंकि सुरक्षा हालात लगातार बदल रहे हैं।
अमरीकी राष्ट्रपति और ईरानी नेतृत्व की तीखी प्रतिक्रियाएं
इस पूरे मामले पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने अपना मौजूदा रास्ता नहीं बदला तो अमेरिका की तरफ से बहुत भारी जवाबी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि तमाम तनाव के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अभी नियंत्रण में है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट किया कि तेहरान युद्ध की शुरुआत नहीं चाहता है लेकिन अपने ऊपर होने वाले किसी भी हमले या आक्रामकता के सामने चुपचाप नहीं बैठेगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस संवेदनशील स्थिति पर बात करते हुए क्षेत्र में नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता की सुरक्षा पर जोर दिया है ताकि आम नागरिकों और व्यावसायिक गतिविधियों को सुरक्षित रखा जा सके।
कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में आई भारी गिरावट
क्षेत्र में लगातार बढ़ते खतरे के कारण शिपिंग डेटा से यह बात सामने आई है कि सप्ताहांत के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही घटकर मात्र लगभग 5 कमोडिटी जहाजों प्रति दिन पर आ गई है। इसके अलावा IRGC ने यह भी जानकारी दी कि एक तेल टैंकर जब एक अनधिकृत रास्ते से गुजर रहा था तब वह दो समुद्री बारूदी सुरंगों से टकरा गया और उसमें भीषण आग लग गई। यह सभी घटनाएं उस जून 2026 के समझौता ज्ञापन के टूटने के बाद सामने आई हैं जिसे दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए साइन किया गया था। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों और कारोबारियों के लिए यह समय काफी सावधानी बरतने का है क्योंकि समुद्री और हवाई रास्तों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।