Saudi Crown Prince MBS को बड़ा झटका, सैनिक देने से मना किया इस इस्लामिक देश ने.

Lov Singh19 September 20262 min read24 viewsSaudi
Saudi Crown Prince MBS को बड़ा झटका, सैनिक देने से मना किया इस इस्लामिक देश ने.

दमिश्क/रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों (अंसारुल्लाह) से जूझ रहे सऊदी अरब को अब एक और बड़ा झटका लगा है। तुर्की मीडिया आउटलेट Türkiye Today की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने सऊदी अरब की उस मांग को साफ़ ठुकरा दिया है, जिसमें रियाद ने सीरियाई लड़ाकों को यमन भेजकर हूतियों के खिलाफ जंग में उतारने की गुज़ारिश की थी।

सूत्रों ने खोले राज़

रिपोर्ट में सीरियाई सूत्रों के हवाले से कहा गया है:

  • सऊदी अरब ने पिछले कई महीनों से यमन में अपनी सैन्य ज़रूरतें पूरी करने के लिए सीरियाई लड़ाकों की मांग की थी
  • सीरियाई सरकार ने इस प्रस्ताव को "विनम्रता से" लेकिन साफ़ इनकार कर दिया
  • सीरिया का तर्क — देश अभी अपनी सेना को संगठित करने की प्रक्रिया में व्यस्त है और किसी तीसरे पक्ष के तौर पर किसी और के संघर्ष में नहीं कूदना चाहता
  • हालांकि दमिश्क ने यह भी साफ़ किया कि अगर कोई सीरियाई नागरिक व्यक्तिगत तौर पर यमन जाकर लड़ना चाहे, तो सरकार उसे रोकेगी नहीं — पर उसकी ज़िम्मेदारी भी नहीं लेगी
  • तुर्की के शामिल होने की अफवाहों को भी सूत्रों ने पूरी तरह खारिज कर दिया
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क्या सऊदी अरब सच में अकेला पड़ता जा रहा है?

यह इनकार अपने आप में बड़ी खबर है, लेकिन असली कहानी तब और दिलचस्प हो जाती है जब इसे हाल की एक और रिपोर्ट के साथ जोड़ा जाए — खबरों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की उस मांग को ठुकरा दिया था, जिसमें हूतियों पर सीधे अमेरिकी हमले की गुज़ारिश की गई थी। अमेरिका ने सिर्फ खुफिया जानकारी और "नॉन-कायनेटिक सपोर्ट" देने तक ही खुद को सीमित रखा।

यानी सोचिए — न अमेरिका सीधे लड़ने को तैयार, न अब सीरिया अपने लड़ाके भेजने को राज़ी!

टाइमिंग पर भी उठ रहे सवाल

यह इनकार ऐसे वक़्त पर सामने आया है जब:

  • हूती लड़ाके बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास एक अहम रेड सी द्वीप पर कब्ज़ा जमा चुके हैं — जो सऊदी तेल निर्यात के लिए बेहद अहम रास्ता है
  • यमन में ज़मीनी लड़ाई और तेज़ हो चुकी है
  • रियाद और अल-खर्ज पर हाल ही में बड़े मिसाइल हमले की खबरें सामने आ चुकी हैं

ऐसे नाज़ुक मोड़ पर जब सऊदी अरब को अपने साथी देशों से फौरी सैन्य मदद की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, तब सीरिया जैसे नए-नवेले सहयोगी का भी हाथ खींच लेना — रियाद के लिए कूटनीतिक और सामरिक, दोनों मोर्चों पर एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

⚠️ ध्यान दें: यह रिपोर्ट सीरियाई सूत्रों के हवाले से Türkiye Today ने प्रकाशित की है। सऊदी अरब या सीरिया की सरकार की तरफ से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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