इसराइल का नया पैंतरा, AI चैटबॉट पर कब्जा करने के लिए अमरीकी थिंक टैंक का किया इस्तेमाल.

Aanya4 September 20262 min read34 viewsWorld
इसराइल का नया पैंतरा, AI चैटबॉट पर कब्जा करने के लिए अमरीकी थिंक टैंक का किया इस्तेमाल.

दुनियाभर में इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का बोलबाला है और हर कोई जानकारी के लिए चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहा है। इसी बीच इसराइल की एक बड़ी चाल सामने आई है जिसमें प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए एक फर्जी अमरीकी थिंक टैंक का सहारा लिया गया। पत्रकार Said Arikat ने अल जजीरा इंग्लिश में एक ओपिनियन पीस छापा जिसमें इस बात का खुलासा किया गया कि कैसे इसराइल ने AI के जरिए जनता की सोच को बदलने का नया तरीका निकाला है। इस पूरे मामले को Hanover Affair का नाम दिया गया है जो दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

फर्जी संस्थान के जरिए फैलाया गया प्रोपेगैंडा

जांच में पता चला कि Hanover Institute for Public Policy नाम का संस्थान सिर्फ कागजों पर चल रहा था। इस संस्थान ने दावा किया था कि यह अमरीका का एक थिंक टैंक है, लेकिन असलियत में इसका कोई दफ्तर या असली रिसर्चर नहीं था। इस फर्जी संस्थान के जरिए 6 अगस्त से 14 अगस्त 2026 के बीच 100 से ज्यादा रिपोर्ट्स छापी गईं जिनमें 560,000 से ज्यादा शब्द थे। इस पूरे खेल का खुलासा Foreign Agents Registration Act (FARA) के दस्तावेजों से हुआ। इस काम के लिए सारा पैसा इसराइल सरकार ने दिया जिसे LaPam यानी इसराइल की सरकारी विज्ञापन एजेंसी के जरिए भेजा गया था।

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बड़े विज्ञापनों और कंपनियों का हुआ इस्तेमाल

इस पूरे डिजिटल प्रोपेगैंडा को चलाने की जिम्मेदारी न्यूयार्क की कंपनी Piro Inc. को दी गई थी जिसके साथ $900,000 का डिजिटल कम्युनिकेशन का ठेका साइन हुआ था। इसके अलावा Havas Media को भी सबकॉन्ट्रैक्ट दिया गया ताकि इस सामग्री को बड़े पैमाने पर फैलाया जा सके। इस सामग्री का मुख्य मकसद यह था कि लोग जब इंटरनेट पर खोज करें तो चैटबॉट उन्हें इसराइल के पक्ष में जानकारी दें।

AI चैटबॉट को ऐसे दिया गया धोखा

जानकारों का मानना है कि इस कंटेंट को खास तौर पर AI Story Optimization तकनीक के तहत तैयार किया गया था। इसका असर ChatGPT, Perplexity, Claude, Gemini और Microsoft Copilot जैसे सभी बड़े चैटबॉट्स पर पड़ रहा था ताकि वे इसराइल और फिलिस्तीन के मामलों में एकतरफा जानकारी दिखाएं। NewsGuard की एनालिस्ट Alice Lee ने बताया कि इन लेखों को इस तरह लिखा गया था कि AI इन्हें सच मान ले क्योंकि इसमें पक्के आंकड़े और डेटा का इस्तेमाल किया गया था। वहीं Quincy Institute के रिसर्च एसोसिएट Nick Cleveland-Stout ने कहा कि यह संस्थान भले ही академиक यानी पढ़ाई-लिखाई वाला निकाय होने का दिखावा कर रहा था, लेकिन गहराई से जांच करने पर इसकी बातों में कोई लॉजिक नहीं निकलता था। जब इस मामले का खुलासा हुआ तो Spamhaus Project ने 14 अगस्त 2026 के आसपास इस डोमेन hanoverinstitute.com को अपने ब्लॉकलिस्ट में डाल दिया।

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