लेबनान पर इसराइल का बड़ा हमला, ड्रोन अटैक के बाद हुई एयरस्ट्राइक में कई लोगों की मौत.

लेबनान के दक्षिणी इलाकों में इसराइली सैन्य बलों ने 5 सितंबर 2026 को भारी गोलाबारी और हवाई हमले किए, जिसके बाद वहां हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। इसराइली सेना यानी IDF की तरफ से यह कार्रवाई हिजबुल्लाह की एक हरकत के जवाब में की गई थी, जिसमें लेबनान की तरफ से इसराइली सैनिकों पर एक विस्फोटक ड्रोन दागा गया था। इस ड्रोन को इसराइली सेना के कमांडो ब्रिगेड ने हवा में ही रोक लिया और किसी भी इसराइली सैनिक के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई। इसके बावजूद इसराइली सेना ने इसे युद्धविराम का सीधा उल्लंघन माना और तुरंत कार्रवाई करने का फैसला किया।
लेबनान में हुआ भारी नुकसान
लेबनानी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस 5 सितंबर को हुए हमलों में कुल 5 लोगों की मौत हो गई और 24 लोग घायल हुए। वहीं दूसरी तरफ कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि इस हमले में कम से कम 3 लोग मारे गए और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। नबातीह के कफर रेमैन शहर में एक मोटरसाइकिल को निशाना बनाकर किए गए एक खास हवाई हमले में दो लोगों की जान चली गई। सैन्य कार्रवाई टायर, नबातीह और बेका इलाकों के पांच अलग-अलग हिस्सों में दर्ज की गई, जिसमें कई घरों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया गया। मंसूरी और मजदौन के बीच स्थित अल-मुशा इलाके में भी भारी तबाही देखने को मिली।
इसराइली सेना का दावा और सीमा पर तनाव
इसराइली सेना ने आधिकारिक रूप से यह भी घोषणा की कि उन्होंने रणनीतिक अली अल-ताहेर रिज और उसके नीचे बने सुरंग नेटवर्क पर अपना पूरा ऑपरेशनल नियंत्रण हासिल कर लिया है। हालांकि, हिजबुल्लाह संगठन की तरफ से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को UNIFIL की प्रवक्ता कंदील आर्डिएल ने ब्लू लाइन के पास सुरक्षा स्थिति में आई भारी गिरावट पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि इस इलाके में इसराइली सैन्य गतिविधियों का बढ़ना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 और लेबनान की संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन लगातार यह मांग कर रहा है कि इसराइली सेना को ब्लू लाइन के दक्षिण में वापस चले जाना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र का बड़ा फैसला
यह सारा तनाव उस समय के बावजूद बना हुआ है जब जून के आखिर में एक फ्रेमवर्क समझौता हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य इसराइल की क्रमिक वापसी और हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों का हथियार डालना था। हालांकि हिजबुल्लाह ने लिटानी नदी के उत्तर में अपने हथियार छोड़ने की मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अमेरिका और इसराइल के भारी दबाव के बाद दक्षिणी लेबनान में चल रहे UNIFIL शांति मिशन को 31 दिसंबर 2026 तक पूरी तरह से समाप्त करने के लिए वोटिंग कर दी है। इसके बाद साल 2027 के दौरान यहां से सैनिकों की पूरी तरह से वापसी होने की उम्मीद जताई जा रही है।