लेबनान पर इस्राइल का बड़ा हमला, एयरस्ट्राइक में सात लोगों की मौत और एक अस्पताल पूरी तरह तबाह.

दक्षिण लेबनान में इस्राइल की तरफ से किए गए भीषण हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है और करीब 20 लोग घायल हुए हैं। यह हमले रविवार, 6 सितंबर 2026 की सुबह तड़के हुए, जिससे पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और हालात काफी तनावपूर्ण हो गए। मरने वालों में कई महिलाएं और तीन बच्चे भी शामिल हैं, जो इस हिंसा की चपेट में आ गए। इन हमलों ने आम लोगों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है और इलाके में डर का माहौल बना हुआ है।
इस्राइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ा तनाव
इस्राइल की सेना का कहना है कि यह कार्रवाई हिजबुल्लाह द्वारा अली ताहेर रिज इलाके में तैनात इस्राइली सैनिकों पर दो ड्रोन दागे जाने के जवाब में की गई थी। इस्राइली सेना ने इस ड्रोन हमले को नियमों का उल्लंघन बताया। हमले से पहले इस्राइली सेना ने अरब सलीम के स्थानीय लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी और कम से कम 300 मीटर दूर जाने को कहा था। सेना का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया है, जो कथित तौर पर मेडिकल इमारतों के भीतर बनाए गए थे। इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज़ ने साफ कह दिया है कि जब तक हिजबुल्लाह को पूरी तरह हथियारों से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक इस्राइल दक्षिण लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा।
अस्पताल और ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान
इन हमलों में भारी इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान हुआ है, जिसमें नबातियेह अल-फौका का गांदौर अस्पताल पूरी तरह तबाह हो गया। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि पुराना होने और पिछले हमलों के कारण यह अस्पताल पहले ही दो महीने पहले बंद हो चुका था, लेकिन फिर भी इस पर हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का साफ उल्लंघन है। मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से लेकर अब तक लेबनान में 17 अस्पतालों को नुकसान पहुंच चुका है, और दक्षिण इलाके के तीन अस्पताल पूरी तरह बंद हो चुके हैं। इसके अलावा नबातियेह शहर में एक ऐतिहासिक इमारत और वित्त तथा कृषि विभागों के दफ्तर भी तबाह हो गए हैं।
लेबनान सरकार की अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इन घटनाओं को बहुत खतरनाक बताया है और अमेरिका तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत दखल देने की अपील की है। दूसरी ओर, हिजबुल्लाह ने इन हमलों से पहले ही साफ कर दिया था कि वह सीधी बातचीत नहीं करेगा और अंतरराष्ट्रीय चुप्पी पर नाराजगी जताई। यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका की मध्यस्थता से जून में युद्धविराम हुआ था और कतर के प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमैन बिन जासिम अल थानी ने लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम से बात करके शांति बनाए रखने की अपील की थी।