Israel Ban UK MPs: इसराइल ने 11 ब्रिटिश सांसदों पर लगाया बैन, यूके के प्रतिबंध के बाद उठाया बड़ा कदम.

Nura Basta10 September 20263 min read37 viewsWorld
Israel Ban UK MPs: इसराइल ने 11 ब्रिटिश सांसदों पर लगाया बैन, यूके के प्रतिबंध के बाद उठाया बड़ा कदम.

ब्रिटेन द्वारा वेस्ट बैंक की बस्तियों पर प्रतिबंध लगाने के बाद इसराइल सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। इसराइल ने 11 ब्रिटिश सांसदों और एक वकील फहद अंसारी के देश में आने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है।

ब्रिटेन का नया प्रतिबंध और इसराइल की प्रतिक्रिया

ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबंड ने 8 सितंबर 2026 को एक नए प्रतिबंध नियम की घोषणा की थी। इस नियम के तहत कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अवैध इसराइली बस्तियों में बनने वाले सामानों के आयात पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही उन हथियारों के लाइसेंस और निर्यात पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है जो इस कब्जे में मदद करते हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नीम ने इन उपायों का बचाव करते हुए कहा कि दो-राष्ट्र समाधान को बचाने के लिए यह कदम उठाना बहुत जरूरी था।

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इस बात से नाराज होकर इसराइल के विदेश मंत्री गिदेव सार ने इन यात्रा प्रतिबंधों का ऐलान किया। उन्होंने प्रभावित लोगों पर इसराइल के खिलाफ और यहूदी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके साथ ही उन्होंने कब्जे वाले पूर्वी यरूशलम में स्थित ब्रिटिश कंसुलट को अगले 30 दिनों के भीतर बंद करने का आदेश दिया। इसराइल ने अमेरिका के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल गाजा सपोर्ट सेंटर से ब्रिटिश प्रतिनिधियों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया है और फलस्तीनी बलों को दी जाने वाली ब्रिटिश ट्रेनिंग को भी तुरंत प्रभाव से खत्म कर दिया है। इसराइली विदेश मंत्री ने ब्रिटेन के इन फैसलों को सरासर झूठ बताया और आरोप लगाया कि ब्रिटिश सरकार लगातार इसराइल के खिलाफ काम कर रही है।

बैन किए गए सांसद और उनकी प्रतिक्रिया

इसराइल द्वारा प्रतिबंधित किए गए 11 ब्रिटिश सांसदों में जेरेमी कॉर्बिन, जारा सुल्ताना, नाज शाह, डायने एबॉट, जॉन मैकडोनेल, रिचर्ड बर्गरन, हन्ना स्पेंसर, कार्ला डेनयर, सियान बेरी, एली चाउंस और एडियन रामसे शामिल हैं। इन सभी नेताओं पर इसराइल में घुसने पर पाबंदी लगा दी गई है।

हालांकि इन नेताओं पर लगे बैन का कोई खास असर उनके तेवर पर नहीं दिखा है। जेरेमी कॉर्बिन और जारा सुल्ताना समेत कई सांसदों ने इस बैन को अपने लिए सम्मान का मेडल बताया है। इन नेताओं ने साफ कहा है कि वे फलस्तीनी लोगों के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करेंगे और आगे भी अपना समर्थन जारी रखेंगे। जेरेमी कॉर्बिन ने 10 सितंबर 2026 को छपे अपने एक लेख में भी इस बात को दोहराया था कि वे अपने रुख पर पूरी तरह कायम हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली जुली प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर दुनिया भर से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसराइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने ब्रिटेन के इन प्रतिबंधों की आलोचना की है, हालांकि बाद में व्हाइट हाउस ने उनके बयानों से खुद को अलग कर लिया। ब्रिटेन के अंदर भी इसको लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। कंजर्वेटिव पार्टी की नेता केमी बैसेनोच ने इस नीति को सिर्फ दिखावटी राजनीति बताया है। वहीं, खुफिया एजेंसी एमआई16 के पूर्व प्रमुख सर रिचर्ड डिएरलाव ने चेतावनी दी है कि इससे दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के काम पर बुरा असर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ, इसराइल के पूर्व प्रधानमंत्री एहुद ओल्मर्ट और नेसेट के पूर्व स्पीकर अब्राहम बर्ग ने इन प्रतिबंधों का स्वागत किया है। उनका मानना है कि ये प्रतिबंध देश की वैधता के खिलाफ नहीं बल्कि यहूदी आतंकवादियों को टारगेट करने के लिए हैं। संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव करार दिया है।

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