Israel News: इसराइल में वेस्ट बैंक हमले के बाद मंत्री बेन-गवीर ने की मौत की सजा की मांग

इसराइल में सुरक्षा मामलों को लेकर एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला सामने आया है जहां सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने घातक गोलीबारी की घटना के बाद आतंकवादी के लिए सीधे मौत की सजा की मांग उठाई है। इस पूरी घटना के बाद से वहां का राजनीतिक और सुरक्षा माहौल काफी ज्यादा गर्म हो गया है और आम जनता के बीच भी इस बात की चर्चा बहुत तेज हो गई है कि सरकार अब नियमों को लेकर कितनी सख्त होने वाली है।
घटना और प्रधानमंत्री का कड़ा एक्शन
यह पूरी घटना 20 सितंबर 2026 की है जब सेंट्रल वेस्ट बैंक में Neve Tzuf बस्ती के पास इसराइली नागरिक 30 वर्षीय Netanel Shakron की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हमला योम किप्पुर की छुट्टी की पूर्व संध्या पर हुआ था। इस दर्दनाक घटना के बाद इसराइल के नेशनल सिक्योरिटी मिनिस्टर Itamar Ben-Gvir ने घोषणा की कि यह मामला देश के नए Death Penalty for Terrorists Law के तहत पहला ऐसा मामला बनता है जिसमें मौत की सजा दी जानी चाहिए। फार-राइट ओत्ज़मा यहुदित पार्टी के नेता बेन-गवीर ने साफ शब्दों में कहा कि संदिग्ध हमलावर को फांसी के फंदे पर लटकाया जाना चाहिए बशर्ते वह इस हमले के बाद बच जाए।
इस बीच देश के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक हत्यारा कृत्य करार दिया है। प्रधानमंत्री ने तुरंत सुरक्षा बलों को अपने ऑपरेशंस तेज करने का आदेश दिया है जिसमें इलाकों में नाकेबंदी करना, टारगेटेड गिरफ्तारियां करना और हमलावर के घर को गिराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शामिल है। हमलावर को मौके पर ही घायल अवस्था में पकड़ लिया गया था जिसे बाद में रामल्लाह के पास एक अस्पताल से इसराइली सेना यानी IDF द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।
मौत की सजा से जुड़ा नया कानून
जिस कानून के तहत यह मांग की जा रही है उसे इसराइल की संसद यानी Knesset द्वारा 30 मार्च 2026 को भारी बहुमत से पारित किया गया था। इस कानून को पहले नवंबर 2025 में पहली रीडिंग के दौरान मंजूरी मिली थी और बाद में इसे वोटिंग के जरिए पास किया गया। इस नए कानून के तहत घातक आतंकवादी हमलों के लिए फांसी की सजा को डिफॉल्ट सजा के रूप में अनिवार्य कर दिया गया है। यह प्रावधान विशेष रूप से उन अपराधों को निशाना बनाता है जो देश के अस्तित्व को मिटाने के लिए किए जाते हैं।
सैन्य अदालतों में, जहां मुख्य रूप से फिलिस्तीनी आरोपियों के मामले चलाए जाते हैं, वहां जजों का एक साधारण बहुमत ही मौत की सजा सुनाने के लिए काफी होता है। इसके अलावा नियमों के अनुसार अंतिम फैसले के 90 दिनों के भीतर सजा को पूरा करना अनिवार्य किया गया है। यह कानून 7 अक्टूबर 2023 के हमलों जैसी पुरानी घटनाओं पर लागू नहीं होता है और इसमें केवल विशेष परिस्थितियों में ही उम्रकैद की सजा की अनुमति दी जाती है।
कानूनी चुनौतियां और क्षेत्रीय तनाव
इस नए कानून को लेकर देश के भीतर और बाहर काफी विरोध भी देखने को मिल रहा है। एसोसिएशन ऑफ सिविल राइट्स इन इसराइल यानी ACRI ने 30 मार्च 2026 को ही सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर इस कानून को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने इस कानून को असंवैधानिक, नस्लवादी और भेदभावपूर्ण करार दिया था। इन सभी आलोचनाओं और विरोधों के बावजूद सरकार ने इस कानून को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
हाल ही में 18 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने एक जेल विंग के भीतर फांसी घर का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है। इस तरह के सख्त कदमों से साफ जाहिर होता है कि सरकार सुरक्षा के मोर्चे पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है, हालांकि इससे क्षेत्र में तनाव और भी ज्यादा बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इस पूरी स्थिति पर देश और दुनिया की पैनी नजर बनी हुई है क्योंकि यह फैसला आने वाले समय में न्याय प्रणाली और सुरक्षा नीतियों पर गहरा असर डालने वाला है।