इजरायल चुनाव में विदेशी फंडिंग के आरोपों को अरब पार्टियों ने नकारा, जांच में सहयोग का वादा

इजरायल की अरब राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव में विदेशी फंडिंग और हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। मंसूर अब्बास ने जांच में सहयोग का भरोसा दिया।

Gautam Sahu29 October 20262 min read0 viewsWorld
इजरायल चुनाव में विदेशी फंडिंग के आरोपों को अरब पार्टियों ने नकारा, जांच में सहयोग का वादा

यरूशलेम (इजरायल): इजरायल में मंगलवार को हुए चुनावों के बाद विदेशी फंडिंग और हस्तक्षेप के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। अरब राजनीतिक पार्टियों ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। यह विवाद तब बढ़ा जब सेंट्रल इलेक्शन कमेटी ने इन आरोपों की जांच के आदेश दिए, जिससे अगली सरकार बनाने की प्रक्रिया के बीच तनाव बढ़ गया है।

यूनाइटेड अरब लिस्ट (Ra’am) के अध्यक्ष मंसूर अब्बास ने जांच के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी का इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं है। अब्बास ने कहा कि चुनाव की पवित्रता और कानून के शासन को बनाए रखना एक नागरिक और लोकतांत्रिक कर्तव्य है, इसलिए वे सच्चाई का पता लगाने के लिए कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे।

वहीं, बलाद पार्टी के अध्यक्ष सामी अबू शहादेह ने इन आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके सहयोगियों पर अरब पार्टियों और अरब जनता के प्रति राजनीतिक दुश्मनी बढ़ाने का आरोप लगाया। शहादेह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह सब अरब पार्टियों को अवैध रूप से अयोग्य ठहराने और मतदान के दिन अरब कस्बों में वोट कम करने की कोशिशों के बाद शुरू हुआ है।

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शहादेह ने आगे आरोप लगाया कि चुनाव के दिन हथियारों से लैस सैकड़ों दक्षिणपंथी कार्यकर्ता मतदान केंद्रों पर तैनात थे ताकि लोगों को डराया जा सके। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू और उनके साथी बिना किसी सबूत के इन आरोपों के जरिए चुनाव परिणामों को चुनौती देने की जमीन तैयार कर रहे हैं।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सेंट्रल इलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस नोम सोहलबर्ग ने शिन बेट प्रमुख डेविड ज़िनी को जांच के निर्देश दिए। संदेह है कि इजरायल के हितों के खिलाफ काम करने वाली संस्थाओं ने विदेशी फंडिंग के जरिए चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की। जस्टिस सोहलबर्ग ने एजेंसी से एक हफ्ते के भीतर अपनी रिपोर्ट मांगी है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस विवाद को एक भूकंप की तरह बताया है। उन्होंने दावा किया कि विदेशी ताकतों ने अरब पार्टियों के पक्ष में हस्तक्षेप किया है और उन्होंने अन्य जायोनिस्ट पार्टियों से अपील की है कि वे राआम और जॉइंट लिस्ट के साथ सहयोग न करें।

दूसरी ओर, विपक्ष के नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी ईसेनकोट ने गहन जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पुष्टि के संदेहों का इस्तेमाल चुनाव परिणामों को कमजोर करने या 26वें नेसेट (संसद) के उद्घाटन में देरी करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ईसेनकोट ने कहा कि शिन बेट को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और नई संसद को तय समय पर मिलना चाहिए।

इजरायल पुलिस ने भी चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी सभी शिकायतों की जांच करने का भरोसा दिया है।

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