Israel News: इसराइल ने दक्षिणी सीरिया में बढ़ाई सैन्य घुसपैठ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहा विरोध.

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया है क्योंकि इसराइली सैन्य बलों ने 13 सितंबर 2026 को दक्षिणी सीरिया के दमिश्क और कुनेत्रा के ग्रामीण इलाकों में अपनी सैन्य घुसपैठ को काफी ज्यादा फैला लिया है। इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के दौरान भारी संख्या में टैंक, बुलडोजर और कई वाहन सीरियाई क्षेत्र के अंदर तक लाए गए, जिससे वहां के स्थानीय लोगों और प्रशासन में भारी चिंता का माहौल बन गया है। इस पूरी घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसराइल के इन कदमों की कड़ी आलोचना की जा रही है और विभिन्न देशों के बड़े नेता इस पर लगातार अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
इसराइली सेना की इस कार्रवाई में बेइत जिन फार्म क्षेत्र, सैदा अल-हानौत के पश्चिम, अल-राफिद, ऐन अल-नौरियाह और ताल अहमार जैसे महत्वपूर्ण ठिकाने मुख्य रूप से निशाने पर रहे। इन इलाकों में सैनिक लगातार गश्त कर रहे हैं और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अल-राफिद में सैनिकों ने कई घरों की तलाशी ली, बेइत जिन में नए चेकपॉइंट बनाए और ऐन अल-शआरा तथा बेइत जिन के पास भारी तोप से गोलाबारी की गई। इसके अलावा रस्म अल-हयादिरा इलाके में भारी गोलीबारी और फ्लेयर्स छोड़े जाने की घटनाएं सामने आईं, जबकि अल-अमल फार्म्स क्षेत्र में एक गश्ती दल ने वापसी से पहले जमीन के एक हिस्से में आग लगा दी।
इसराइल का पक्ष और क्षेत्रीय बफर जोन की बात
इसराइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने 13 सितंबर को यह साफ कर दिया कि उनकी सेना लेबनान, सीरिया और गाजा के कब्जे वाले इलाकों में अनिश्चित काल तक अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहती है। उन्होंने इस सैन्य तैनाती को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अस्थायी बफर जोन के रूप में पेश किया है, लेकिन इस बात से पड़ोसी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं। सीरियाई विदेश मंत्री Asaad al-Shaibani ने 13 सितंबर को इन तमाम संप्रभुता के उल्लंघनों की कड़ी निंदा की और 8 दिसंबर 2024 की पूर्व स्थिति में लौटने तथा 1974 के डिस्एंगेजमेंट समझौते का पूरी तरह से पालन करने की कड़ी मांग की।
मिस्र और तुर्की का कड़ा रुख
मिस्र के अधिकारियों ने भी इस मामले में आधिकारिक बयान जारी किया है और इन लगातार घुसपैठों को अंतरराष्ट्रीय कानून और सीरियाई संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है तथा तुरंत सेना को वापस बुलाने की मांग की है। आप इस बारे में अधिक जानकारी SIS Egypt News पर जाकर पढ़ सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ, तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने कहा कि इसराइल इस क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने का काम कर रहा है और अबू अल-धुहूर बेस पर हुआ हमला सीरिया की सैन्य क्षमता को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश का हिस्सा है। फ्रांस ने भी सैनिकों को पीछे हटाने की मांग करते हुए कहा कि अलगाव क्षेत्र के भीतर इस तरह की सैन्य मौजूदगी 1974 के समझौते का सीधा उल्लंघन करती है।
संयुक्त राष्ट्र और सीरिया की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र ने भी इन सभी घटनाओं पर लगातार कड़ी आपत्ति जताई है। यूएन इंडिपेंडेंट इंटरनेशनल कमीशन ऑफ इंक्वायरी ने 8 सितंबर को चेतावनी दी थी कि नागरिकों को हिरासत में लेना जैसे कार्य युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। सीरिया के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत Ibrahim Olabi ने 12 सितंबर को दोहराया कि सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है। यह पूरा विवाद तब और ज्यादा गहरा गया जब इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 9 सितंबर को माउंट हर्मन का दौरा किया, जिसे सीरियाई विदेश मंत्रालय ने एक भड़काऊ कदम बताते हुए इसकी औपचारिक रूप से कड़ी निंदा की।