इसराइल ने वेस्ट बैंक में की ताबड़तोड़ छापेमारी, कई जगहों पर गिरफ्तारी के बाद हालात तनावपूर्ण.

इसराइली सैन्य बलों ने 5 सितंबर 2026 को कब्जे वाले वेस्ट बैंक में कई जगह बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाए और धरपकड़ की कार्रवाई की। इस दौरान बेथलेहम शहर में एक स्थानीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में लगातार सेना की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं, जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वेस्ट बैंक में लगातार हो रही गिरफ्तारियां
इससे पहले 4 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक इसराइली सैनिकों ने बेथलेहम के धेइशे कैंप समेत कई अन्य इलाकों को अपने घेरे में लिया था। इस कार्रवाई के दौरान मधि श्वेइकी को भी गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई थी। इसके साथ ही इसराइल डिफेंस फोर्सेस यानी IDF के कमांडो ने काबाटिया शहर में खुफिया एजेंसी शिन बेट से मिली जानकारी के आधार पर पांच लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों का दावा था कि ये लोग किसी हमले की योजना बना रहे थे। वहीं न Nablus में चलाए गए एक 48 घंटे लंबे सैन्य अभियान के दौरान 10 संदिग्धों को पकड़ा गया और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को भी जब्त कर लिया गया।
अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई
वेस्ट बैंक के अंदरूनी इलाकों में सुरक्षा हालात काफी अस्थिर बने हुए हैं। इससे पहले 3 सितंबर 2026 को भी सैनिकों ने पूरे क्षेत्र में कुल 21 फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार किया था। इनमें से सात लोग अकेले बेथलेहम प्रांत के अल-दोहा शहर, धेइशे शरणार्थी शिविर, अल-फवाघरा मोहल्ले और बीट फज्जर से पकड़े गए थे। इसके अलावा नबलस, साल्फिट और हेब्रोन शहरों से भी लोगों की गिरफ्तारी की खबरें दर्ज की गई थीं।
हिंसा और विरोध प्रदर्शन का माहौल
अल-मुघय्यर गांव में 2 सितंबर 2026 को हुई एक हिंसक झड़प ने स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ दिया। इस घटना में इसराइली चरमपंथी settlers और सेना के साथ टकराव के दौरान 16 और 19 साल के दो फिलिस्तीनी किशोरों की मौत हो गई थी। इस मामले पर सेना का कहना था कि सैनिकों ने एक हिंसक प्रदर्शन के दौरान मुख्य उपद्रवियों पर गोलियां चलाई थीं और इस पूरी घटना की जांच अभी भी की जा रही है।
प्रधानमंत्री और मानवाधिकार संगठनों के बयान
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उत्तरी वेस्ट बैंक में चलाए गए इन ताजा अभियानों के लिए सेना की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि सेना ने हथियारों की फैक्ट्रियों को नष्ट करने और मिलिटेंट गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। दूसरी ओर फिलिस्तीनी गैर-सरकारी संगठन प्रिजनर्स मीडिया Office ने इन लगातार छापों को मनमाने ढंग से परेशान करने और अत्याचार करने की एक सोची-समझी नीति बताया है। इस संगठन ने इस पूरे मामले में अंतरराष्ट्रीय दखल की मांग की है ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।