इसराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव की तैयारी तेज, आज है उम्मीदवारों की लिस्ट जमा करने का आखिरी दिन।

Praggya Singh sabal8 September 20263 min read26 viewsWorld
इसराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले आम चुनाव की तैयारी तेज, आज है उम्मीदवारों की लिस्ट जमा करने का आखिरी दिन।

इसराइल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव होने वाले हैं, जिसके लिए राजनीतिक पार्टियों और प्रशासन ने अपनी तैयारियां बहुत तेज कर दी हैं। देश की स्वतंत्र संस्था सेंट्रल इलेक्शंस कमेटी के पास उम्मीदवार लिस्ट जमा करने की आखिरी तारीख आज 8 सितंबर 2026 तय की गई है। इस चुनाव के जरिए इसराइल की 26वीं नेसेट (संसद) के सभी 120 सदस्यों को चुना जाएगा। चुनाव में अब दो महीने से भी कम का समय बचा है, और पूरा देश प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली 37वीं सरकार से सत्ता के नए दौर में प्रवेश करने के लिए तैयार हो रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी आप gov.il पर देख सकते हैं।

विदेशों में मतदान और चुनावी प्रक्रिया

चुनाव आयोग के मुताबिक, देश के बाहर रहने वाले नागरिकों के लिए कूटनीतिक मिशनों पर मतदान प्रक्रिया आगामी 20 अक्टूबर से शुरू हो जाएगी। इसके बाद मतदान संपन्न होने के बाद आधिकारिक परिणाम 4 नवंबर तक आने की पूरी उम्मीद है। इसराइल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिसके तहत किसी भी पार्टी को संसद में जगह बनाने के लिए कम से कम 3.25 प्रतिशत का चुनावी कोटा पार करना होता है। इस चुनावी मैदान में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के अलावा गदी एसेनकोट की येशार पार्टी, नफताली बन्नेत और यार लापिद का गठबंधन 'टुगेदर', और कई अन्य दल आमने-सामने हैं। इसके अलावा इतामार बेन-गवीर, बेजालेल स्मोत्रिच, यार गोलन और बेनी गेंट्ज़ के नेतृत्व वाले दल भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

अरब पार्टियों की भूमिका और नए राजनीतिक दल

इस चुनाव में अरब धड़े भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली राम पार्टी और युसूफ जब्बारीन तथा अयमान ओदेह वाला संयुक्त मोर्चा शामिल हैं। इसके अलावा ओफर विंटर का नया राजनीतिक आंदोलन 'अमचा यिसरायल' और योआद हंडेल तथा यारॉन जिलेखा का गठबंधन भी इस चुनावी मैदान में उतर चुका है। चुनाव प्रचार के दौरान मुख्य रूप से गाज़ा का चल रहा युद्ध, क्षेत्रीय संघर्ष, फिलिस्तीनी कैदियों की स्थिति और वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों का विस्तार जैसे मुद्दे छाए हुए हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस चुनाव को अपनी दक्षिणपंथी सरकार और एक कमजोर समझे जाने वाले विकल्प के बीच की सीधी लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं। वहीं, अमेरिकी विशेष दूत जेरेड कुशनर ने 7 सितंबर 2026 को टिप्पणी की थी कि मौजूदा राजनीतिक हलचल के कारण सरकार गाज़ा के मुद्दे पर थोड़ी अव्यवहारिक हो रही है।

सुरक्षा के मुद्दे और अमेरिकी प्रभाव

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 4 सितंबर को साफ कर दिया था कि जुडिय़ा, सामरिया, लेबनान और गाज़ा में सुरक्षा अभियान लगातार जारी रहेंगे। हालांकि, अमेरिकी चिंताओं को थोड़ा शांत करने के लिए उन्होंने 7 सितंबर को वेस्ट बैंक की कुछ अनधिकृत चौकियों को हटाने का आदेश भी दिया। 6 सितंबर को सामने आए एक पोल के मुताबिक, 62 प्रतिशत लोगों ने 7 अक्टूबर 2023 की घटनाओं पर प्रधानमंत्री नेतन्याहू के काम करने के तरीके पर असंतोष जताया है। वर्तमान आंकड़ों को देखा जाए तो दोनों प्रमुख राजनीतिक गुटों के लिए सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का बहुमत हासिल करना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। इस चुनावी बयान और अपडेट्स के बारे में आप प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक बयान को gov.il पर पढ़ सकते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment