इसराइल पर फिर हुआ ड्रोन हमला, सेना ने हवा में मार गिराया तो भड़की जंग और लेबनान में बरपा कहर.

लेबनान की तरफ से इसराइल पर एक बार फिर से खतरनाक ड्रोन हमला करने की कोशिश की गई, जिसे इसराइली सेना ने आसमान में ही रोककर तबाह कर दिया। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और इसराइली सेना ने इसके जवाब में लेबनान के कई इलाकों में जबरदस्त एयर स्ट्राइक कर दी है। इस पूरे मामले में आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता फिर से गहरी हो गई है और प्रशासन ने उत्तर इसराइल के कई इलाकों में लोगों को सतर्क रहने के लिए कह दिया है।
युद्धविराम का उल्लंघन और इसराइली जवाबी कार्रवाई
यह पूरी घटना 4 सितंबर 2026 को हुई, जब इसराइली सेना यानी IDF के कमांडो ब्रिगेड ने दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा जोन में सैनिकों के पास आ रहे एक विस्फोटक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया। इस हमले में किसी भी इसराइली सैनिक के हताहत होने की कोई खबर नहीं मिली है। इसराइली सेना ने इसे युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन करार दिया। इसके तुरंत बाद इसराइल ने लेबनान के अंदर कई ठिकानों को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ जवाबी हमले शुरू कर दिए, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।
लेबनान में हुआ भारी नुकसान
लेबनानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसराइली ड्रोन हमलों की वजह से लेबनान के अलग-अलग हिस्सों में भारी नुकसान हुआ है। Kfar Roummane में हुए एक ड्रोन हमले में दो लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा अली अल-ताहेर रिज पर भी भीषण बमबारी की गई। नबातिएह गवर्नरट के जुतार ए-शारकिया इलाके में एक चलती हुई गाड़ी पर इसराइली सेना की गोलीबारी की वजह से दो अन्य लोगों की जान चली गई। लेबनानी अधिकारियों का कहना है कि मार्च महीने की शुरुआत से लेकर अब तक चल रही इन हिंसक झड़पों में 4,300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, 12,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं और करीब दस लाख से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है।
रणनीतिक ठिकानों पर इसराइल का कब्जा
इस ताजा घटना से पहले उसी दिन इसराइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि इसराइली सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले अली अल-ताहेर रिज पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। इसराइल का दावा है कि इस जगह का इस्तेमाल हिजबुल्लाह द्वारा इसराइल पर हमले करने और सुरंगों का कमांड सेंटर चलाने के लिए किया जा रहा था। इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी इस बात की पुष्टि की कि अब यह इलाका इसराइल के लिए किसी भी तरह का खतरा नहीं है। रक्षा मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक हिजबुल्लाह को पूरी तरह से हथियार नहीं डाल दिया जाता, तब तक इसराइली सेना इस सुरक्षा जोन में बनी रहेगी और सेना के पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
कैदियों की अदला-बदली और कूटनीतिक प्रयास
एक तरफ जहां सीमा पर युद्ध के हालात बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की मध्यस्थता से कुछ राहत भरे कदम भी उठाए गए हैं। अमेरिका के प्रयासों से इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस यानी ICRC की देखरेख में 4 सितंबर को चार कैदियों को इसराइल की हिरासत से लेबनान वापस भेज दिया गया, जिनमें दो लेबनानी और दो सीरियाई नागरिक शामिल हैं। इससे एक दिन पहले भी एक अन्य व्यक्ति को रिहा किया गया था। इसराइल और लेबनान के बीच इन शांति वार्ताओं के बाद लेबनानी राष्ट्रपति Joseph Aoun ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की इन कूटनीतिक कोशिशों के लिए उनका शुक्रिया अदा किया है। हालांकि, ईरान की तरफ से इसराइली सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले ही कड़ी चेतावनी दी जा चुकी है, जिससे यह पूरा इलाका अभी भी बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण बना हुआ है।