इजरायल और लेबनान के बीच जारी जंग से ऑटिज्म और ADHD वाले बच्चों की देखभाल और मानसिक सेहत पर पड़ा बुरा असर

बेरुत: इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे संघर्ष ने ऑटिज्म और ADHD से जूझ रहे बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है। अक्टूबर 2023 से जारी इस तनाव और मार्च 2026 में बढ़ी हिंसा के कारण इन बच्चों की स्थिरता छिन गई है। विस्थापन, धमाकों के शोर और अनिश्चितता की वजह से उन बच्चों को भारी परेशानी हो रही है जिन्हें सुरक्षित महसूस करने के लिए एक तय दिनचर्या की जरूरत होती है।
अल जजीरा इंग्लिश की रिपोर्ट के मुताबिक लेबनान में करीब 7 लाख लोग विस्थापित हुए हैं। इससे वहां की पहले से ही कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है। दिव्यांग बच्चों की ट्रेनर और एक ऑटिस्टिक बेटी की मां लीना कौयूमजियन ने बताया कि युद्ध की वजह से अचानक आने वाले बदलाव इन बच्चों की घबराहट और मनोवैज्ञानिक कमजोरी को और बढ़ा देते हैं।
एसोसिएशन फॉर ऑटिज्म (AAA) की सह-संस्थापक घाडा हायेक मखौल के मुताबिक उनकी संस्था इस समय संकट मोड में काम कर रही है। संस्था को प्रोफेशनल्स की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि बेहतर वेतन की तलाश में प्रशिक्षित विशेषज्ञ देश छोड़कर जा रहे हैं।
आर्थिक तंगी ने इन सेवाओं को आम लोगों की पहुंच से दूर कर दिया है। AAA में हफ्ते में पांच दिन की ट्रेनिंग का खर्च लगभग 700 डॉलर प्रति महीना है। साल 2026 में महंगाई दर 17 फीसदी तक पहुंच गई है और लेबनान की 80 प्रतिशत आबादी गरीबी में जी रही है।
आंकड़ों के अनुसार लेबनान की लगभग आधी आबादी डिप्रेशन, एंग्जायटी या PTSD का शिकार है, जबकि पूरे देश में केवल 70 मनोचिकित्सक कार्यरत हैं। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2024-2030 के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य रणनीति तो बनाई है, लेकिन आर्थिक और सुरक्षा संकट के कारण इसे लागू करना मुश्किल हो रहा है।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने मानवीय सहायता से दिव्यांगों को बाहर रखने की आलोचना की है। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत सशस्त्र संघर्ष के दौरान कमजोर नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की रक्षा करना सभी पक्षों की जिम्मेदारी है।