इसराइल और अमेरिका में तनातनी, अमेरिकी शांति परिषद के साथ सहयोग करने से इसराइली अधिकारियों ने किया साफ़ इंकार।

इसराइल के सैन्य और सरकारी अधिकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के लिए बनाई गई 'शांति परिषद' के साथ सहयोग करने से पूरी तरह मना कर दिया है। इसराइली मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 सितंबर 2026 को यह बड़ी बात सामने आई है, जहां अधिकारी खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। इस ताजा घटनाक्रम के बाद अमेरिका और इसराइल के बीच कूटनीतिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप की शांति योजना और यूएन प्रस्ताव
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 2803 (2025) के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' का गठन किया गया था। इस बोर्ड का मुख्य मकसद गाजा के बदलाव के समय रणनीतिक निगरानी रखना, अंतरराष्ट्रीय संसाधनों को जुटाना और जवाबदेही तय करना था। इस संबंध में व्हाइट हाउस की आधिकारिक घोषणा भी जारी की गई थी। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने यह ऐलान किया था कि बोर्ड ने गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूरी तरह हथियार डालने का एक ऐतिहासिक समझौता करा लिया है।
नेतन्याहू का शांति योजना को ठुकराना
हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव उस समय और ज्यादा गहरा गया जब 9 अगस्त 2026 को इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बोर्ड द्वारा तैयार की गई 15 सूत्रीय शांति योजना को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया। नेतन्याहू ने साफ तौर पर कहा कि जब तक पूरी तरह से हथियार नहीं डाले जाते, तब तक इसराइल अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा और उनकी सरकार ने इस दस्तावेज को मानने से इंकार कर दिया है।
फिलिस्तीनियों के निष्कासन पर विवाद
हाल ही के दिनों में स्थिति तब और ज्यादा पेचीदा हो गई जब इसराइल के कई मंत्रियों ने गाजा पट्टी से फिलिस्तीनियों को बड़े पैमाने पर हटाने की मांग की। इसराइली मंत्रियों के इस रुख का अमेरिकी सरकार ने सार्वजनिक रूप से विरोध किया है। अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहे इन बयानों और फैसलों से मध्य पूर्व की राजनीति में गर्माहट बनी हुई है और दोनों पुराने सहयोगियों के बीच दूरियां साफ नजर आ रही हैं।