इजराइल ने पूर्वी यरूश렘 में UNRWA के आखिरी ट्रेनिंग सेंटर पर किया कब्जा, दुनिया भर में कड़ी निंदा.

मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को इजरायली बलों ने कब्जा किए गए पूर्वी यरूश렘 में UNRWA Qalandia Training Center पर अपना नियंत्रण कर लिया। मई 2026 के बाद से इस जगह पर बिना अनुमति के घुसने की यह पांचवीं घटना थी। इस कार्रवाई की घोषणा प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री Itamar Ben Gvir द्वारा की गई थी, जिसके बाद पुलिस और सेना के जवान मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहर निकाला, इजरायली झंडा फहराया और लगभग 40 लोगों को हिरासत में ले लिया। इस दौरान हुई गोलीबारी में पांच फलस्तीनी लोग घायल हो गए, और इजरायली नगर निगम की टीमों ने इस जगह को एक शैक्षिक और सामुदायिक परिसर में बदलने के लिए नवीकरण का काम शुरू कर दिया।
इजराइल और यूएनआरडब्ल्यूए का पुराना विवाद
इजरायली विदेश मंत्रालय ने यह दावा किया कि इस परिसर को यहूदी राष्ट्रीय कोष की संपत्ति के रूप में वापस लिया जा रहा है, जिसका इतिहास 1937 से जुड़ा हुआ है। उनका यह भी कहना था कि यह कदम इजरायली जमीन पर UNRWA के कामों पर प्रतिबंध लगाने वाले 2024 के नेसेत कानून के नियमों के अनुसार ही उठाया गया है। इसके विपरीत, UNRWA वेस्ट बैंक के निदेशक Roland Friedrich ने बताया कि इस जमीन को साल 1952 में जॉर्डन सरकार द्वारा एजेंसी को दिया गया था। उसी वर्ष स्थापित किए गए इस केंद्र ने हर साल लगभग 270 से 340 छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का काम किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरी घटना के बाद दुनिया भर से बहुत तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने इस कब्जे की बहुत कड़े शब्दों में निंदा की और इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय संयुक्त राष्ट्र की विशेषाधिकार और उन्मुक्ति से जुड़ी संधि के तहत पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बाद बुधवार, 28 अगस्त को यूरोपीय संघ और 14 देशों—जिਨ੍ਹਾਂ में बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, जापान, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्पेन, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन शामिल हैं—ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इन सभी ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया। वहीं, फलस्तीनी विदेश मंत्रालय ने UNRWA कर्मचारियों की सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दखل देने की मांग की है और यह साफ कहा है कि अब केवल मौखिक निंदा से काम नहीं चलेगा।