ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक प्रोजेक्ट पर दी धमकी तो इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन साआर ने कहा हम भी देंगे जवाब

इस्राइल और ब्रिटेन के बीच कूटनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि इस्राइल के विदेश मंत्री Gideon Saar ने ब्रिटेन को साफ चेतावनी दी है कि यदि ब्रिटेन ने वेस्ट बैंक बस्ती परियोजना को लेकर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध लगाए, तो इस्राइल भी चुप नहीं बैठेगा और मुंहतोड़ जवाब देगा। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्राइल की बस्तियों को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है और यूरोपीय देश इस पर सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। इस्राइल के विदेश मंत्री ने एक हिब्रू भाषा में दिए गए इंटरव्यू के दौरान यह स्पष्ट किया कि उनके देश के पास ऐसे कई उपाय और उपकरण मौजूद हैं जिनका इस्तेमाल करके ब्रिटेन के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जा सकती है।
ब्रिटेन की ओर से आया था कड़ा बयान और प्रतिबंधों का ऐलान
यह सारा विवाद ब्रिटेन के विदेश सचिव Ed Miliband द्वारा संसद में दिए गए एक महत्वपूर्ण बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने घोषणा की थी कि आने वाले कुछ हफ्तों के भीतर ब्रिटेन की सरकार इस्राइल की बस्तियों के खिलाफ कई कड़े उपायों का एक व्यापक पैकेज लेकर आएगी। ब्रिटिश सरकार ने वेस्ट बैंक में चल रही E1 settlement project को एक बड़ी लाल रेखा यानी red line करार दिया है। इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग 3,000 से 3,400 नए घरों का निर्माण किया जाना है, और इनमें से करीब 1,200 यूनिट्स के लिए टेंडर भी पहले ही जारी किए जा चुके हैं। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से यरुशलम और माले अदुमिम के बीच की जमीन पूरी तरह से खंडित हो जाएगी, जिससे भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश बनना लगभग असंभव हो जाएगा और टू-स्टेट सॉल्यूशन को बड़ा खतरा पैदा होगा। इसके अलावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Andy Burnham ने भी पहले अवैध बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की अपनी मंशा जाहिर की थी।
इस्राइल का कड़ा रुख और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रिया
इस्राइल के विदेश मंत्री Gideon Saar ने Ynet को दिए इंटरव्यू में ब्रिटेन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ब्रिटिश सरकार लगातार और योजनाबद्ध तरीके से इस्राइल के हितों के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी ब्रिटेन ने इस्राइल के डिफेंस एक्सपोर्ट यानी रक्षा निर्यात पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे और कुछ मंत्रियों पर भी पाबंदियां थोपी थीं। हालांकि उन्होंने अपनी तरफ से किसी खास या बड़े कदम का सीधे तौर पर खुलासा नहीं किया, लेकिन जानकारों का मानना है कि इस्राइल जवाबी कार्रवाई के रूप में इंटरनेशनल गाजा सपोर्ट सेंटर से ब्रिटिश अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा सकता है। दूसरी तरफ मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल यूके के आर्थिक मामलों के निदेशक Peter Frankental ने भी सरकार से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक बस्तियों के साथ होने वाले व्यापार पर पूरी तरह से रोक लगाएं। ब्रिटेन की सरकार पहले ही सेटलर हिंसा के मामलों में चार दौर के प्रतिबंध लगा चुकी है और अपने बिजनेस रिस्क गाइडेंस को भी अपडेट कर चुकी है ताकि कोई भी कंपनी बस्तियों से जुड़े प्रोजेक्ट्स के ठेके लेने से बचे। इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का प्रशासन भी पैनी नजर बनाए हुए है क्योंकि इस्राइल और लंदन के बीच कूटनीतिक रिश्ते लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं।