Israel का कड़ा एलान, ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू किया तो फिर होंगे बड़े हमले

Nura Basta29 August 20262 min read14 viewsWorld
Israel का कड़ा एलान, ईरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम दोबारा शुरू किया तो फिर होंगे बड़े हमले

इजराइल ने ईरान को लेकर एक बहुत बड़ा और सख्त बयान जारी किया है जिसमें साफ कर दिया गया है कि अगर तेहरान सरकार ने अपने परमाणु या मिसाइल कार्यक्रमों को फिर से शुरू करने की कोई भी कोशिश की, तो इजराइल चुप नहीं बैठेगा और सीधे तौर पर सैन्य हमले करेगा। इजराइल के ऊर्जा मंत्री Eli Cohen ने 29 अगस्त 2026 को यह साफ कहा कि उनका देश भविष्य में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सैन्य कार्रवाई करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रखता है। इस बयान के बाद से मिडिल ईस्ट के हालातों पर एक बार फिर से सबकी नजरें टिक गई हैं।

अमेरिका और ईरान के समझौते से इजराइल को मतलब नहीं

मंत्री एली कोहेन ने बहुत साफ शब्दों में यह भी स्पष्ट किया कि इजराइल खुद को अमेरिका और तेहरान के बीच होने वाले किसी भी कूटनीतिक समझौते से बंधा हुआ नहीं मानेगा। इजराइल की रणनीतिक आजादी ऐसे किसी भी समझौते से प्रभावित नहीं होती है और देश अपनी सुरक्षा के लिए अपने फैसले खुद लेगा। इजरायली खुफिया एजेंसियों के पास मौजूद जानकारी के हवाले से यह दावा किया गया कि इस साल 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए संयुक्त अमेरिका-इजराइल हमलों की वजह से ईरान के परमाणु विकास को कम से कम दो से चार साल पीछे धकेलने में पूरी सफलता मिली थी।

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इस पूरे संघर्ष के दौरान इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के सैन्य ढांचे को कई बार निशाना बनाया है और वहां की मौजूदा हुकूमत को बदलने की मांग भी तेज कर दी है। इसके जवाब में ईरान की तरफ से भी क्षेत्र में लगातार मिसाइल हमले किए गए हैं, जिनकी चपेट में कई इजरायली ठिकाने भी आए हैं। अगस्त 2026 के पूरे महीने के दौरान मंत्री एली कोहेन ने कूटनीतिक मेल-मिलाप के रास्ते को छोड़कर ईरान सरकार पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाने की बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है।

मौजूदा ईरानी सरकार के पतन की भविष्यवाणी

इजरायली मंत्री ने पहले ही यह अनुमान जताया था कि ईरान की मौजूदा सरकार अगले दो से तीन साल के भीतर खुद ही गिर जाएगी और उनका दावा है कि इस दिशा में इजराइल ने पहले से ही जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हालांकि 27 अगस्त 2026 तक की स्थिति के मुताबिक, इस भयंकर संघर्ष को सुलझाने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच किसी भी तरह की सक्रिय बातचीत नहीं चल रही है। अमेरिका लगातार ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की नीति पर काम कर रहा है और वहां की अर्थव्यवस्था को दबाने का प्रयास जारी है। इस तनावपूर्ण माहौल का असर उन तमाम प्रवासी कामगारों और आम लोगों पर भी पड़ रहा है जो इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं या जिनकी यात्राएं इन इलाकों से होकर गुजरती हैं।

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