इजरायल की ईरान को दोटूक चेतावनी: अमेरिका से समझौता करें वरना झेलनी होगी सैन्य कार्रवाई

Gautam Sahu5 October 20262 min read0 viewsWorld
इजरायल की ईरान को दोटूक चेतावनी: अमेरिका से समझौता करें वरना झेलनी होगी सैन्य कार्रवाई

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। भारत में इजरायल के राजदूत रेउवेन अज़ार ने ईरान को बेहद सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि तेहरान को या तो अमेरिका के साथ शर्तों पर समझौता करना होगा या फिर सीधे सैन्य परिणामों के लिए तैयार रहना होगा। राजदूत अज़ार ने साफ किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को डराने और वैश्विक व्यापार को बाधित करने की अपनी कोशिशों में पूरी तरह विफल रहा है।

राजदूत अज़ार ने ईरान पर "बदनीयती" से बातचीत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान ने बार-बार यह साबित किया है कि वह ईमानदारी से बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने अपनी दिशा नहीं बदली, तो उसे वास्तविकता का सामना करना पड़ेगा और यह मुकाबला सैन्य स्तर पर जा सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक व्यापार पर ईरान की विफलता

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ईरान लंबे समय से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल शिपमेंट को बाधित करने की कोशिश कर रहा है ताकि दुनिया पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, इजरायली राजदूत के अनुसार, यह रणनीति काम नहीं आई है। उन्होंने बताया कि ईरान के हमलों के बावजूद, तेल की आपूर्ति पहले के स्तर पर वापस आ गई है।

अज़ार ने कहा कि दुनिया के तानाशाहों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि वे दूसरों को ब्लैकमेल करके या आतंकवाद को वित्तपोषित करके अपनी विनाशकारी नीतियों को आगे नहीं बढ़ा सकते। उन्होंने विशेष रूप से ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को आगाह किया कि अगर उनकी आक्रामक नीतियां जारी रहीं, तो इसका खामियाजा आम ईरानी जनता को भुगतना पड़ेगा।

इस बीच, अमेरिका में भी हलचल तेज है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने कैंप डेविड में एक गुप्त बैठक की है। इस बैठक में ईरान के खिलाफ अगले कदमों और यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान पर चर्चा हुई। बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ जैसे बड़े अधिकारी शामिल थे।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाल ही में संकेत दिया था कि अब फैसला करने का समय आ गया है—या तो ईरान समझौते पर हस्ताक्षर करे, अन्यथा उसका अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

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