इजराइल चुनाव से पहले वेस्ट बैंक में हिंसा का राजनीतिक इस्तेमाल, नेताओं पर लगे गंभीर आरोप.

Praggya Singh sabal31 August 20263 min read5 viewsWorld
इजराइल चुनाव से पहले वेस्ट बैंक में हिंसा का राजनीतिक इस्तेमाल, नेताओं पर लगे गंभीर आरोप.

इजराइल में होने वाले आगामी चुनावों से पहले वेस्ट बैंक के हालात को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है। यहूदी-अरब सामाजिक आंदोलन 'स्टैंडिंग टूगेदर' के राष्ट्रीय सह-निदेशक 'एलन-ली ग्रीन' ने 31 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वेस्ट बैंक में बढ़ती हिंसा का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है ताकि आगामी इजराइली विधाई चुनाव में ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल किए जा सकें। यह चुनाव 27 अक्टूबर 2026 को तय किए गए हैं।

इस पूरे मामले में प्रधानमंत्री 'बेंजामिन नेतन्याहू', राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री 'इतामार बेन-गवीर' और वित्त मंत्री 'बेजालेल स्मोट्रिच' पर तीखे आरोप लगाए गए हैं। नेताओं पर आरोप है कि वे कट्टर-दक्षिणपंथी मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए क्षेत्रीय अस्थिरता का फायदा उठा रहे हैं। एलन-ली ग्रीन ने मौजूदा स्थिति को क्षेत्र में तनाव का सबसे बड़ा दौर बताया है। उनका कहना है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद से वेस्ट बैंक में बस्तियों से जुड़ी हिंसा को एक आम बात बना दिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों के आंकड़े

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संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) के आंकड़ों से भी इस बात की पुष्टि होती है। OCHA के रिकॉर्ड के अनुसार, 2026 की शुरुआत से लेकर जुलाई के अंत तक फिलिस्तीनियों या उनकी संपत्ति पर 1,330 से ज्यादा हमले दर्ज किए गए हैं। पिछले दो दशकों में इन हमलों की यह सबसे अधिक फ्रीक्वेंसी है। इसके अलावा, ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे बड़े संगठनों ने भी इजराइली सरकार पर इस तरह की हिंसा को बढ़ावा देने और रोकने में नाकाम रहने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

राजनीतिक गलियारों में विरोध और आलोचना

हालाँकि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 29 अगस्त 2026 को कुसरा गांव में हुई हिंसा की सार्वजनिक रूप से निंदा की थी, लेकिन राजनीतिक हलकों में उनकी इस निंदा पर संदेह जताया जा रहा है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री 'गादी ईसेनकोट' ने देश में बढ़ते तनाव के लिए सीधे तौर पर नेतन्याहू सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने सरकार के कामकाज के तरीके को बहुत कमजोर और खतरनाक राजनीतिक फैसलों से प्रेरित बताया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइली सेना की सेंट्रल कमांड ने प्रधानमंत्री को पहले ही देश में अराजकता फैलने की आशंका को लेकर जानकारी दे दी थी।

नई राजनीतिक पार्टी का गठन और आगामी चुनाव

आगामी अक्टूबर चुनावों और कानूनी परेशानियों के बीच इजराइल की राजनीति काफी उलझ गई है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू पहले से ही भ्रष्टाचार के मामलों का सामना कर रहे हैं और 2024 में उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है। इन तमाम राजनीतिक हालातों के बीच, 'स्टैंडिंग टूगेदर' संगठन के नेताओं ने जून 2026 में एक नए यहूदी-फिलिस्तीनी राजनीतिक दल की शुरुआत की है। इस पार्टी का नाम 'अ प्लेस फॉर अस ऑल' (माकोम लेकुलानू) रखा गया है। यह नई पार्टी पुरानी व्यवस्था को बदलने और क्षेत्र में शांति, बराबरी तथा कब्जे को खत्म करने की बात कह रही है।

सरकारी आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि नेतन्याहू और वित्त मंत्री स्मोट्रिच ने लेट 2022 के बाद से वेस्ट बैंक में 104 अवैध बस्तियों और 160 कृषि आउटपोस्ट को मंजूरी दी है। इसके अलावा, मार्च 2026 में आतंकवादियों के लिए मौत की सजा से जुड़ा एक विवादित कानून भी पास किया गया है। अक्टूबर में होने वाले चुनावों से ठीक पहले ये सभी मुद्दे इजराइल की राजनीति और वहां की दिशा तय कर रहे हैं।

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