लेबनान में इजरायली व्हाइट फास्फोरस का इस्तेमाल: अल जजीरा की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

अल जजीरा की पत्रकार रीम ताकीद्दीन की एक हालिया रिपोर्ट ने दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना द्वारा व्हाइट फास्फोरस (White Phosphorus) के उपयोग से पैदा हुए भयानक मानवीय और पर्यावरणीय संकट को उजागर किया है। इस अत्यधिक ज्वलनशील और प्रतिक्रियाशील रसायन के इस्तेमाल ने न केवल स्थानीय आबादी के लिए खतरा पैदा कर दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नागरिकों पर सीधा हमला और बढ़ती चोटें
रिपोर्ट के अनुसार, ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) और हार्वर्ड लॉ स्कूल के शोध के आधार पर यह पाया गया है कि मार्च से मई 2026 के बीच दक्षिणी लेबनान में व्हाइट फास्फोरस के इस्तेमाल की 23 घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से एक भयावह मामला 3 मार्च 2026 का है, जब योहमोर (Yohmor) शहर के रिहायशी इलाकों के ऊपर आर्टिलरी से व्हाइट फास्फोरस दागा गया था।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं:
- अक्टूबर 2023 से लेकर 2024 के मध्य तक कम से कम 173 लोग इस रसायन के संपर्क में आने से घायल हुए हैं।
- ह्यूमन राइट्स वॉच ने विशेष रूप से M825-सीरीज के 155mm आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल्स की पहचान की है, जो हवा में फटते ही व्हाइट फास्फोरस छोड़ते हैं।
क्या यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है?
हालांकि व्हाइट फास्फोरस को आधिकारिक तौर पर 'रासायनिक हथियार' की श्रेणी में नहीं रखा गया है, लेकिन घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत प्रतिबंधित है। 1980 के कन्वेंशन ऑन सर्टेन कन्वेंशनल वेपन्स (CCW) के प्रोटोकॉल III के तहत ज्वलनशील हथियारों के उपयोग को विनियमित किया गया है। लेबनान इस संधि का हस्ताक्षरकर्ता है, लेकिन इजरायल नहीं है।
इजरायल और मानवाधिकार संगठनों के बीच विरोधाभास
इस मुद्दे पर दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं:
- इजरायली रक्षा बल (IDF) का तर्क: इजरायल का कहना है कि वे इस पदार्थ का उपयोग मुख्य रूप से सैन्य अभियानों के दौरान 'स्मोक स्क्रीन' (धुआं पैदा करने) के लिए करते हैं और उनका उद्देश्य नागरिकों को निशाना बनाना नहीं है।
- मानवाधिकार संगठनों का दावा: एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों का कहना है कि नागरिक बुनियादी ढांचे के पास इस रसायन का उपयोग कभी नहीं किया जाना चाहिए। यह रसायन शरीर में हड्डियों तक गहरा घाव कर सकता है और ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही दोबारा जलना शुरू कर सकता है।
"इस रसायन के कारण होने वाली चोटों से न केवल गंभीर जलन होती है, बल्कि लंबे समय तक श्वसन संबंधी समस्याएं, अंगों का फेल होना और गहरा मनोवैज्ञानिक आघात भी पहुंच सकता है।"
आगे की राह: संयुक्त राष्ट्र में उठने वाली है आवाज
व्हाइट फास्फोरस के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए ह्यूमन राइट्स वॉच अब अंतरराष्ट्रीय नियमों को और कड़ा करने की मांग कर रही है। बताया जा रहा है कि इस गंभीर मुद्दे को अक्टूबर 2026 में होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के निशस्त्रीकरण सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाया जाएगा।