ईरान सीमा के पास इजरायली वायुसेना ने किया बड़ा सैन्य अभ्यास और अमेरिका के साथ मिलकर बनाई हमले की रणनीति

Gautam Sahu22 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान सीमा के पास इजरायली वायुसेना ने किया बड़ा सैन्य अभ्यास और अमेरिका के साथ मिलकर बनाई हमले की रणनीति

तेल अवीव: इजरायली वायुसेना ने सोमवार 19 अक्टूबर 2026 को ईरान की सीमा के पास एक बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किया। इस ऑपरेशन में दर्जनों फाइटर जेट्स और हवाई ईंधन भरने वाले टैंकर्स शामिल थे, जो ईरान सीमा तक उड़ान भरकर वापस इजरायल लौटे।

इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस अभ्यास का मकसद तेहरान को अपनी सैन्य ताकत दिखाना और संभावित हमलों को रोकना था। विमानों ने सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल किया, जो पिछले हमलों के दौरान अपनाए गए रणनीतिक रास्तों जैसे थे।

इसी दिन अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मुलाकात हुई। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका और इजरायल ईरान के ऊर्जा और परमाणु केंद्रों के खिलाफ एक केंद्रित ऑपरेशन की योजना बना रहे हैं। यह कार्रवाई 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद हो सकती है।

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दूसरी तरफ ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। 21 अक्टूबर को आईआरजीसी प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरान अब सिर्फ बचाव नहीं करेगा और हमले की स्थिति में दुश्मन के इलाके में घुसकर प्रहार करेगा। फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि तेहरान अब अमेरिका और इजरायल के हमले को तय मान रहा है।

संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबफ ने संभावित युद्ध के लिए आर्थिक और सैन्य तैयारियों को लेकर सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई से सलाह ली है। तनाव तब और बढ़ गया जब 20 अक्टूबर को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों को रोका है।

कूटनीतिक स्तर पर स्थिति को संभालने की कोशिशें जारी हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ को बताया कि तेहरान के साथ समझौते के लिए बातचीत का रास्ता अभी खुला है। वहीं अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने कहा कि विभाग के कर्मियों और उनके परिवारों की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है।

अक्टूबर की शुरुआत में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे और परमाणु स्थलों पर बड़े पैमाने पर बमबारी पर विचार किया था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध के बाद इस मिशन को टाल दिया गया, क्योंकि ट्रंप की प्राथमिकता 3 नवंबर के चुनाव थे। इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर 20 अक्टूबर को उच्च स्तरीय बातचीत के लिए तेहरान गए थे।

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