दक्षिणी लेबनान में इसराइली हवाई और तोपखाने के हमलों में भारी तेजी, कूटनीतिक तनाव के बीच हजारों लोग बेघर

बुधवार, 9 सितंबर 2026 को इसराइली सैन्य बलों ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में ताबड़तोड़ हवाई और तोपखाने से हमले किए। इन हमलों की वजह से आम नागरिकों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं और इलाके में डर का माहौल बना हुआ है। इस सैन्य कार्रवाई में नबातिएह अल-फवका, कफर तेबनित, दोहा कफर रोउमान, मंसूरी, सारबाइन, मजदाल जौउन, काब्रिखा, वादी जिबकिन और वादी सलूकी जैसे कई क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, इसराइली टैंकों को खियाम के पूर्वी हिस्से की तरफ आगे बढ़ते हुए भी देखा गया है।
ड्रोन हमले में एक की मौत और लेबनान सेना का बड़ा दावा
मारज हरूफ-जेबदिने सड़क पर एक मोटरसाइकिल को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की जान चली जाने की पुष्टि हुई है। लेबनान की सेना ने जानकारी दी है कि इस युद्ध जैसी स्थिति में काफी तेजी आई है और उन्होंने इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। लेबनान सेना के अनुसार, जून के महीने से लेकर अब तक इसराइल ने अमरीका की मध्यस्थता से बने फ्रेमवर्क समझौते का लगभग 7,700 बार उल्लंघन किया है। इन उल्लंघनों में लेबनान के सैन्य कर्मियों और गश्ती दलों के पास गोलीबारी करना भी शामिल है। लेबनान सेना का यह भी कहना है कि इस तरह की हरकतों से देश में शांति स्थापित करने के प्रयासों को तगड़ा झटका लग रहा है और फ्रेमवर्क समझौता खतरे में पड़ गया है, जिसे सेना चेकपॉइंट और ऑब्जर्वेशन पोस्ट बनाकर बचाने की कोशिश कर रही है। पिछले एक हफ्ते के दौरान अकेले नबातिएह जिले से लगभग 20,000 आम नागरिकों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगह जाना पड़ा है।
संयुक्त राष्ट्र की गहरी चिंता और इसराइल का पक्ष
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस बढ़ती हिंसा पर अपनी गहरी चिंता जताई है और नबातिएह के आसपास के इलाकों में हालात को लेकर गंभीर बात कही है। उन्होंने महिलाओं और बच्चों समेत नागरिकों की बढ़ती मौतों की कड़ी निंदा की है। गुटेरेस ने तुरंत प्रभाव से लड़ाई रोकने, लेबनान की जमीन से इसराइली सेना को वापस बुलाने और अंतरराष्ट्रीय मानवीय नियमों का पूरा सम्मान करने की मांग की है। उन्होंने उन रिपोर्टों की भी आलोचना की जिनमें अस्पतालों, स्वास्थ्य कर्मियों और सार्वजनिक संस्थानों को हमलों में नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। दूसरी तरफ, इसराइली सेना का कहना है कि उनकी ये सैन्य कार्रवाई केवल हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे और हथियारों की अदला-बदली करने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए है, और वे युद्धविराम समझौते के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हालांकि लेबनान के अधिकारियों का आरोप है कि इसराइल जानबूझकर कूटनीतिक रास्तों को कमजोर कर रहा है, फिर भी वे शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।